22 February 2019



प्रादेशिक
जेल में खुली देश की पहली आंगनवाड़ी
16-04-2013
अब उन माताओं के मासूम बच्चे शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे, जो किसी गुनाह की सजा जेल में कैद रहकर काट रही हैं। इनबच्चों में जेल के अंदर ही शिक्षा के बीज बोए जाएंगे, जो अपनी मां के साथ हैं या फिर वहीं जन्मे हैं। इसके लिए जेल में ही आंगनवाड़ी संचालित की जा रही है। इसकी आधारशिला इंदौर के जिला जेल से रखी गई है। इसकी शुरुआत एक महिला कैदी ने जेल में ही जन्मे बच्चे के नाम से की गई है। बच्चे का नाम कान्हा है और उसके नाम से ही आंगनवाड़ी केंद्र का शुभारंभ सोमवार को महिला बाल विकास राज्य मंत्री रंजना बघेल ने किया। इस मौके पर उन्होंने प्रदेश के हर जेल में इसी तर्ज पर पायलेट प्रोजेक्ट के तहत आंगनवाड़ी केंद्र खोलने की घोषणा की। इस आंगनवाड़ी केंद्र में कान्हा के साथ अन्य महिला कैदियों के 8 बच्चे भी पढ़ाई करेंगे। इसे शुरू कराने में पिछले कई सालों से जेल में 6 साल तक के बच्चों को पढ़ा रही एक सामाजिक कार्यकर्ता विनीता तिवारी का योगदान भी है। उनकी मांग पर ही प्रदेश सरकार ने आंगनवाड़ी खोलने का फैसला लिया। इससे महिला कैदी भी खुश हैं और जेल का स्टाफ भी। इस आंगनवाड़ी को बनाने में कैदियों ने मदद की है। सजधज कर पहुंचे बच्चे जिला जेल में सोमवार को एक अलग ही माहौल था। वहां महिला कैदियों के साथ रहने वाले 9 मासूम बच्चों को नए कपडे़ पहनाकर तैयार किया गया। वे भी खुश थे, क्योंकि अब वे पढ़ने लिखने की पहली दहलीज पर कदम रखने वाले थे। मनु मेमोरियल शिक्षण संस्था चलाने वाली विनीता तिवारी ने बताया कि वे पिछले 9 साल से 6 साल तक की उम्र के बच्चों को पढ़ा रही हैं। अब तक 113 बच्चे पढ़ चुके हैं। उन्हें कई दिनों से लग रहा था कि छोटे बच्चों का भरण-पोषण और शिशु आहार जैसी व्यवस्था नहीं है। इसके लिए उन्होंने महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी विशाल नाड़कर्णी से संपर्क किया। नाड़कर्णी ने योजना से सरकार को अवगत करवाया और चार दिन के भीतर ही आंगनवाड़ी खुल गई। अब बच्चे 5 घंटे तक जेल के वातावरण से अलग हटकर पढ़ाई कर सकेंगे। उन्हें हफ्ते में एक-दो बार शहर में कई जगह घुमाने फिराने भी ले जाया जाता है। पायलेट प्रोजेक्ट लेकर प्रेरणा बनाएंगे आंगनवाड़ी का उद्घाटन करने आई मंत्री बघेल ने कहा कि यह जेल के अंदर देश ऐसी पहली आंगनवाड़ी है। अब इसे पायलेट प्रोजेक्ट मानकर हर जेल में आंगनवाड़ी खोलने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे छोटे बच्चे शिक्षा प्रा कर सकें।