22 February 2019



राष्ट्रीय
दिल्ली गैंगरेप: आरोपी मुकेश की याचिका खारिज
22-04-2013
16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली के वसंत विहार में चलती बस में युवती के साथ हुए गैंगरेप के मामले में आरोपी मुकेश और अक्षय की ओर से एफआईआर रद्द करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही प्रतिदिन की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने उक्त दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों पर लगे आरोप गंभीर हैं और अभियोजन के पास आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। आरोपियों ने एफआईआर रद्द कराने के लिए जो आधार पेश किए हैं, वे भी ठोस एवं तर्कसंगत नहीं है। इस मामले में आरोपी मुकेश और अक्षय की ओर से अधिवक्ता एमएल शर्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उन पर दर्ज एफआईआर को रद्द कराने एवं साकेत कोर्ट में चल रही प्रतिदिन की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। उक्त मामले में पहले ही दिन अक्षय ने अपने नए अधिवक्ता एपी सिंह के माध्यम से खुद का नाम इस याचिका से वापस लिए जाने की अपील की थी। वहीं, इस मामले में अधिवक्ता शर्मा का कहना था कि मुकेश का नाम एफआईआर में नहीं था। लिहाजा, उसके खिलाफ यह मामला नहीं चलाया जा सकता। इस मामले में बचाव पक्ष को गवाहों से जिरह के लिए अतिरिक्त समय भी प्रदान नहीं किया जा रहा। ऐसे में न्याय में पारदर्शिता नहीं लाई जा सकती, जब तक उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए उचित समय न दिया जाए। उन्होंने हर गवाह से जिरह के लिए एक दिन का अतिरिक्त समय मांगा था, मगर निचली अदालत ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। लिहाजा, चलते मामले की प्रतिदिन हो रही सुनवाई पर रोक लगाई जाए। इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से अधिवक्ता दयान कृष्णन का कहना था कि बचाव पक्ष को गवाहों से जिरह का पूरा मौका दिया जा रहा है। बचाव पक्ष अतिरिक्त समय की मांग कर केस को लंबा खींचना चाहता है, जबकि केस का स्पीडी ट्रायल चल रहा है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता द्वारा कई बार अदालत में गैर हाजिर रह कर केस को लटकाने का प्रयास किया जा चुका है। उक्त मामले में याचिका दायर करने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता शर्मा उच्च न्यायालय में पेश नहीं हुए थे। इस मामले में लगातार दो बार उनके गैर हाजिर रहने पर न्यायालय ने मामले में कड़ी आपत्ति जाहिर की थी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता से इस मामले में जिरह का अधिकार छीनते हुए उनकी याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।