21 February 2019



प्रादेशिक
नेबरहुड पुलिसिंग का सहारा लेगी सरकार
23-04-2013
मप्र में महिलाओं-बच्चियों से बलात्कार की लगातार घटनाओं व अन्य अपराधों पर काबू पाने राज्य सरकार ने \'नेबरहुड पुलिसिंग\' का मॉडल अपनाने की कवायदें शुरू की हैं। यह मॉडल ब्रिटेन में कामयाब है। इसमें पड़ोसियों की भूमिका का व्यापक महत्व है। इसे मप्र के चारों महानगरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर में प्रयोग के तौर पर अपनाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि सिवनी में पांच वर्षीय बालिका से बलात्कार समेत हाल की ऐसी ही घटनाओं से सरकार के अंदरखानों में हड़कंप है। मुख्यमंत्री ने मुख्यसचिव आर परशुराम को इस संबंध में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को परशुराम ने आनन-फानन में चुनिंदा अफसरों की बैठक बुलाकर हालातों की समीक्षा की। उन्होंने ताजा मामलों में पुलिस-प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की जानकारी ली और नेबरहुड पुलिसिंग को प्रायोगिक तौर पर अपनाने का सुझाव दिया। ताकि समय पर किसी अपराध या इसकी कोशिश की सूचना मिल सके। गृह विभाग के अपर मुख्यसचिव आईएस दाणी को इस मॉडल को लागू करने के लिए एक योजना तैयार करने का दायित्व सौंपा है। गौरतलब है कि मप्र में ग्राम रक्षा समितियां भी काम कर रही हैं, नेबरहुड पुलिसिंग के ढांचे में इस स्वरूप को भी कुछ सीमा तक शामिल किया जा सकता है। बैठक में मुख्यसचिव ने पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे से कहा कि मैदानी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट किया जाए कि केवल महिलाओं के साथ घटनाएं होने पर ही नहीं, बल्कि हमेशा महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें। कुछ अफसरों ने कहा कि महिला उत्पीड़न के आरोपियों को फांसी जैसे कठोर दंड मिलने के बावजूद इस तरह के अपराध करने वालों में खौफ का संदेश नहीं जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं अधिक होती हैं वहां पर कठोर दंड का प्रचार-प्रसार जरूरी है। किसने क्या कहा पंचायत ग्रामीण विकास की अपर मुख्य सचिव अरुणा शर्मा ने कहा कि महिलाएं इजी टारगेट होती हैं। पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने कहा अकेले पुलिस के बस की बात नहीं समाज को आगे लाना होगा। एडीजी इंटेलीजेंस विवेक जौहरी ने कहा कि महिला एवं बाल अपराधियों को चिन्हित कर उन पर निगरानी रखना होगी। ओएसडी मुख्यमंत्री सुधीर सक्सेना ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक होते हैं महिला अपराध। महिला-बाल विकास प्रमुख सचिव बीआर नायडू बैठक में सिर्फ मुख्य सचिव सहित अफसरों की बातें नोट करते रहे यह होगा एक्शन प्लान ग्रीष्मावकाश में स्कूल-कॉलेजों के शिक्षकों की भागीदारी से सामाजिक सहयोग लेकर महिलाओं के प्रति संवेदनशील रवैए के विकास के लिए आयोजन होंगे। ग्रामीण क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अमले का सहयोग लिया जाएगा विशेष ग्राम सभाओं के आयोजन होंगे। इनमें महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए जनभागीदारी बढ़ाने पर विचार होगा। तत्काल प्रारंभ की जाने वाली गतिविधियों के अंतर्गत बाल अपराधों पर भी अंकुश लगाने कार्यशालाएं होंगी। बडे़ शहरों से ग्राम स्तर तक महिलाओं और बच्चों के विरद्घ अपराधों की रोकथाम, संदिग्ध और समाज विरोधी व्यक्यिों की पहचान, पुलिस को आवश्यक सूचनाएं देकर आवश्यक सहयोग करने और महिलाओं का आत्मबल बढ़ाने के लिए संयुक्त कोशिशें होंगी।