17 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
चीन ने परमाणु डिजायन बेच भारत के खिलाफ रची थी साजिश!
24-04-2013

वाशिंगटन। भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। ड्रैगन के लाल इरादों को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उजागर किया है। सामने आए एक डॉक्यूमेंट के मुताबिक सत्तर की दशक में सीआईए के पास यह सूचना थी कि एक व्यापक पैकेज के तहत चीन ने पाक को न्यूक्लियर डिजाइन दिया होगा। सीआईए के इस डेटा के मुताबिक, सीआईए के पास पाकिस्तान और चीन के बीच परमाणु सहयोग के सबूत थे। 1963 से पाकिस्तान और चीन के बीच बने खास संबंध पर इंटेलिजेंस कम्यूनिटी की खास नजर थी। नेशनल सिक्यूरिटी आरचीव के अनुसार ऐसे आरोप तो पहले भी सामने आते रहे हैं। लेकिन पहली बार सीआईए ने इस तरह के खुलासे किए हैं। आंकलन के मुताबिक 1974 में पाकिस्तान को परमाणु संपन्न बनाने की मौखिक सहमति बनी। अपुष्ट जानकारी के मुताबिक 1976 तक परमाणु बनाने की तकनीकी एक विशेष पैकेज के तहत पाकिस्तान को उपलब्ध करा दिया गया। 1983 में सीआईए के आंकलन के मुताबिक पाकिस्तान परमाणु हथियार बना तो सकता था लेकिन बिना चीन की मदद से वह उसका टेस्ट नहीं कर सकता था। चीन ने जब डिजायन उपलब्ध करा दिया तो इस्लामाबाद का कंफीडेंस बढ़ गया। यह केवल एक तरफा सहयोग नहीं था इसके बदले में पाकिस्तान ने यूरेनियम की गैस सेन्ट्रिफ्यूज तकनीकी शेयर की थी। बाद में चीन ने 1990 में पाकिस्तान को हजारों मैग्नेट रिंग बेचे थे। यह सब उस सेंटीफ्यूज में लगाए गए जिससे उच्च कोटि का संवर्धित यूरेनियम बनाया गया। यही यूरेनियम परमाणु बमों में प्रयोग किया जाता है। एनएसए ने कहा है कि सीआईए के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं था इसीलिए बीजिंग और वाशिंगटन में साधारण संबंध रहे। पुख्ता सबूत नहीं होने की वजह से तत्कालिन अमेरिकी सरकार परमाणु के अप्रसार पर कोई कठोर कदम नहीं उठा पा रही थी।