17 February 2019



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भ्रष्ट आईएएस अफसरों पर सरकार मेहरबान क्यों
22-03-2012

करोड़ों रुपए के प्रिंटिंग घोटाले में फंसे इस अफसर की शिकायतें जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और चीफ सेक्रेटरी तक पहुंची तो उन्होंने इसे लूप लाइन में फेंकना ही उचित समझा। हैरत की बात तो यह है कि अब जबकि एमके सिंह के मामले की जांच चल रही है तो यह अफसर न तो समय से जवाब दे रहा है औऱ न ही सरकार उसके खिलाफ सख्ती बरत रही है। एमके सिंह के भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के पास पूरा कच्चा चिठ्ठा है लेकिन कार्रवाई में टालमटोल हो रही है।

ऐसे ही और अफसर हैं विनोद सेमवाल, केपी राही, शशि कर्णावत ,संजय शुक्ल, राजेश राजौरा, इन सबके मामले में भी शासन भ्रष्टाचार के सुबूत होते हुए भी उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। लोकायुक्त संगठन इन अफसरों से जुड़े जिन मामलों में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ चालान पेश करने की अनुमति मांग रहा है वहां शासन उन्हें अनुमति देने में ही आनाकानी कर रहा है। छोटे अधिकारियों तथा कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ तो आईएएस अफसर ईमानदारी पूर्वक जांच की परमीशन दे देते हैं लेकिन बात जब आईएएस की होती है तो इन अफसरों के मामले उदाहरण हैं जो सालों से परमीशन के लिए पड़े हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि ये कथित ईमानदार आईएएस अफसर भ्रष्ट नहीं हैं तो उनमें चालान की परमीशन देने में हर्ज क्या है अदालत है तो सही गलत का फैसला वहां हो ही जाएगा लेकिन भ्रष्ट अफसरों को मालूम है कि यदि एक बार मामला अदालत में गया तो वहां क्या हश्र होना है। यही वजह है कि सारे भ्रष्ट अफसर इन दिनों य़ुनाईटेड होकर ऐसे काम कर रहे हैं कि कहीं लोकायुक्त को उनके मामलों में परमीशन न मिलें साथ ही अदालत जाने से भी मामला बचा रहे।

अब जिम्मेदारी विपक्ष में बैठी कांग्रेस की है। कांग्रेस चाहे तो केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के जरिए भ्रष्ट आईएएस अफसरों की सूची निकालकर उन पर सीधे कार्रवाई कर सकती है इससे एक ओर तो प्रदेश में जारी ऊपरी स्तर का भ्रष्टाचार रुकेगा और कांग्रेस यह संदेश देने में भी सफल हो जाएगी कि सरकार में बैठकर विपक्ष की उपेक्षा करना या भ्रष्टाचार करना जनता बर्दाशत नहीं करेगी।  हालांकि कई टुकड़ों में बंटी कांग्रेस के लिए भी यह संभव नहीं है कि वह मिशन 2013 के लिए अभी से ठोस काम करे लेकिन बीजेपी के लिए कम से कम यह मौका है कि वह ऊपरी स्तर पर जमें भ्रष्ट अफसरों से अभी से किनारा कर ले वरना आने वाले विधानसभा चुनावों में जनता यह सवाल तो पूछेगी ही सत्ता में रहते हुए भ्रष्टाचार की गंगोत्री आपने साफ क्यों नहीं की।