22 February 2019



प्रादेशिक
सरकार की सूरत संवारने की कोशिश में सीएम
02-05-2013
चुनावी तैयारियों की दृष्टि से मप्र की मैदानी नब्ज टटोलने से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मैदानी स्तर पर माकूल पदस्थापनाएं करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कई पेंडिंग मामलों पर भी अपना निर्णय सुना दिया है। लेकिन सरकारी कर्मचारियों के तबादलों से इस बार प्रतिबंध हटने के आसार फिलवक्त नहीं है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री अपनी सरकार की छवि को जल्द से जल्द संवारना चाहते हैं। हाल में अपने मंत्रियों और उनसे वाबस्ता कुछ प्रकरणों में सरकार के घिरने से वे चिंतित भी हैं। इसीलिये उन्होंने प्रशासनिक व राजनीतिक स्तर से डैमेज कंट्रोल प्लान तैयार किया है। गत दिवस स्टेट हैंगर पर चुनिंदा अफसरों से साथ घंटों बैठक इसी कवायद का हिस्सा थी। कुछ विश्वस्त अफसरों को भी मैदानी फीडबैक के लिये सघन दौरों पर भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भी विभिन्न दौरों और कार्यक्रमों के जरिये अब पूरे प्रदेश में सघन दौरे व सभाओं के लिये कमर कस ली है। इसका मुख्य मकसद चुनाव पूर्व हालातों और लोगों का माइंड सेट भांपना है। इसीलिये गत दिवस उन्होंनें सीएस व कुछ और अफसरों के साथ बैठकर ढेरों पेंडिंग मामलों को निपटाने के फार्मूले तैयार किये हैं। इनमें राज्य प्रशासनिक सेवा और राज्य पुलिस सेवा के अफसरों के बडे़ पैमाने पर तबादलों को भी हरी झंडी दी गई है। बताया जाता है कि इस सवंर्ग के तबादले आगामी कई दिनों तक किश्तों में होंगे। यह चुनाव आयोग के तकाजों के तहत हो रहे हैं। लेकिन नयी जमावट बहुत सारे पहलुओं को समझकर की जा रही है। क्योंकि यह चुनाव पूर्व सरकार की निर्णायक जमावट है। जबकि एक दर्जन जिलों में कलेक्टरों की नयी पदस्थापना भी की जाएगी। जिसमें भोपाल भी शामिल है। कर्मचारियों को साधने की बेताबी सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने मुख्यसचिव और अन्य वरिष्ठ अफसरों के साथ कर्मचारी वर्ग को साधने के विषय पर लंबा विमर्श किया है। समझा जाता है कि अगले दो सप्ताह के भीतर इसका असर भी नजर आ जाएगा। दरअसल प्रदेशव्यापी हड़ताल से कर्मचारियों ने अपनी ताकत दिखाकर सरकार पर दबाव बना दिया है। लेकिन इनकी मांगे इतनी व्यापक हैं कि इन्हें पूरा करने के लिये सरकार को खजाना लुटाना पडे़गा। इसीलिये सावधानी के साथ इन मांगों का सभी कोणों से परीक्षण करने के लिये कहा गया है। तबादलों से प्रतिबंध नहीं हटेगा इस वर्ष तबादलों के लिये सामान्य प्रशासन विभाग ने नीति का मसौदा भी काफी पहले सीएम सचिवालय भिजवा दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री के स्तर से इस पर आगे की कार्रवाई के लिये कोई संकेत नहीं आया है। चुनावी वषर्ष होने की वजह से मुख्यमंत्री इस बार तबादलों से प्रतिबंध हटाने के मूड में नहीं है। इसके बजाए जरूरी तबादलों के लिये समन्वय के जरिये आदेश जारी करने का बीच का रास्ता निकालने के पक्ष में हैं। जानकार सूत्र बताते हैं कि तबादलों के चलते हर वषर्ष दो महीने तक होने वाली \'उठापटक\' और इसका करोड़ों के उद्योग के रूप में प्रचारित हो जाने की वजह से वे सरकार को किसी भी दाग से बचाने की कोशिश में हैं। सीएम की इस मंशा के विपरीत उनके मंत्री तबादलों से प्रतिबंध हटने के पक्ष में हैं। ताकि चुनावी वर्ष में इसका लाभ लिया जा सके। उल्लेखनीय होगा कि हर वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक मप्र में तबादलों से प्रतिबंध हटा दिया जाता है। लेकिन इस बार मई माह आने के बाद भी सरकार के स्तर पर इसे लेकर सन्नाटा है।