17 February 2019



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सीमा पर लड़ने वाला जीवन से हारा
06-05-2013
देश की सरहद पर दुश्मन से लड़ने वाले सेना के जवान जीवन से हार रहे हैं। शनिवार को सेना के एक 28 साल के जवान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले 23 साल के एक कैडेट ने फांसी लगा ली थी। सेना ने दोनों आत्महत्याओं की वजह बीमारी से परेशान होना बताया है। पखवाडे़ भर में हुई दो घटनाओं से कई सवाल खडे़ हो गए हैं। सेना के इंफैंट्री स्कूल के सिपाही विकास पिता हनुमंत सिंह भौसले [28] ने 2 मई को अपने बंद कमरे में जहरीली दवा पी ली थी। जवान की मौत 3 मई की रात को अस्पताल में हुई। शनिवार को पोस्टमॉर्टम किया गया। वह मूल रूप से खेड़ली महाराष्ट्र का रहने वाला था। सेना ने आत्महत्या का कारण बीमारी बताया है, जबकि परिवार वालों का कहना है कि उसने कभी बीमारी का कोई जिक्र भी नहीं किया। महू टीआई नागेंद्रसिंह बैस के अुनसार जवान की मौत की सूचना सेना से शनिवार को मिली। पीएम करवाकर शव सौंप दिया गया है। परेशान था पर बीमारी नहीं विकास के चचेरे भाई विशाल भौंसले ने कहा कि विकास जब गुड़ी पड़वा पर तीन दिन की छुट्टी पर घर आया था तो परेशान दिख रहा था। वह किसी गहरी चिंता में था, उसका चेहरा भी उतरा हुआ था। कारण पूछा तो वह टाल गया था। विकास की सेना में 10 सालों की नौकरी हो गई थी, लेकिन उसे इतना परेशान कभी नहीं देखा था। विशाल ने बताया कि न तो वह बीमार दिखा और न ही उसने किसी भी तरह की बीमारी होने का कोई जिक्र किया। अब घर में कोई नहीं है विशाल ने बताया कि विकास के माता-पिता वृद्ध हैं और घर में शादी लायक बहन दीपाली है। परिवार की सारी जिम्मेदारी विकास पर ही थी। उसके जाने के बाद परिवार पर सभी तरह की परेशानियों का बोझ टूट पड़ा है।