21 February 2019



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प्लास्टिक पार्क को कैबिनेट की मंजूरी
08-05-2013
राजधानी के समीप रायसेन के तामोट में 138 एकड़ में एक अरब की लागत से प्लास्टिक पार्क की स्थापना होगी। इसके लिए केंद्र सरकार से अनुदान और हुडको से कर्ज लिया जाएगा। इसके अलावा सरकार सभी संभाग, जिला और तहसील मुख्यालयों के कार्यालय भवन बनाने पर डेढ़ सौ करोड़ और तहसील मुख्यालयों में शासकीय अमले के लिए मकान बनाने पर 90 करोड़ रुपए खर्च करेगी। शिवराज काबीना की एक पखवाडे़ बाद हुई बैठक में मंगलवार को यह निर्णय लिये गये। तामोट में प्लास्टिक पार्क की स्थापना हेतु औद्योगिक विकास निगम भोपाल की 138 एकड़ भूमि को स्पेशल पर्पज व्हीकल के पक्ष में हस्तांरण करने के साथ ही भूमि को रजिस्ट्रेशन एक्ट एवं इंडियन स्टेम्प एक्ट के प्रावधानों के तहत पंजीयन शुल्क एवं स्टाम्प ड्यूटी में छूट देने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन हुआ। एकेवीएन इसकी क्रियान्वयन एजेन्सी रहेगा। 25 हजार को रोजगार इस पार्क में प्लास्टिक सेक्टर की लगभग डेढ़ सौ इकाई स्थापित होंगी और इनसे लगभग 25 हजार लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। अभी तीस उद्योगपतियों-निवेशकों ने अंश धारण हेतु राशि अग्रिम जमा कराई है। प्लास्टिक पार्क परियोजना में ऑल इंडिया प्लास्टिक मेन्यूफेक्चर्स एसोसिशन मुंबई तथा उसके सदस्यों ने रुचि प्रदर्शित कर प्लास्टिक सेक्टर में बड़ा निवेश लाने के लिए ट्राइफेक के साथ करारनामे पर दस्तखत किए हैं। भवन निर्माण: कैबिनेट ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत तहसील, जिला एवं संभाग कार्यालयों के भवनों की निर्माण की योजना में 150 करोड़ रपए की स्वीकृति दी। इन भवनों की अनुशंसा परियोजना परीक्षण समिति द्वारा की गई है। कम आबादी वाली तहसीलों में 90 करोड़ की आवास निर्माण योजना भी मंजूर हुई। इंडस्ट्रीयल कॉरीडोर इसके अलावा दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर परियोजना हेतु डीएमआईसी ट्रस्ट नई दिल्ली के साथ होने वाले स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट शेयर होल्डर्स एग्रीमेंट के मसौदे तथा इन्वेस्टमेंट नोडलस्तरीय स्पेशल पर्पज व्हीकल का अनुमोदन हुआ। परियोजना में सबसे पहले पीथमपुर-धार-महू इन्वेस्टमेंट रीजन विकसित किया जा रहा है। इन्वेस्टमेंट नोड में ट्रंक इन्फास्ट्रक्चर विकसित करने पांच वर्ष में तीन हजार करोड़ की केन्द्रीय वित्ताीय सहायता उपलब्ध होगी। कैबिनेट प्रवक्ता व संसदीय कार्य मंत्री नरोत्ताम मिश्रा ने बताया कि कैबिनेट ने ओंकारेश्वर परियोजना में वन भूमि के एवज में 339 करोड़ रुपए देने की मंजूरी देते हुए यह प्रस्ताव पारित किया है कि राशि वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में छूट का आवेदन किया जाएगा। मिश्रा ने बताया कि कैबिनेट बैठक के बाद हुई मंत्रिपरिषद की राजनीतिक मामलों की समिति ने मप्र शासकीय प्राध्यापक संघ को शासन से पत्र व्यवहार के लिए मान्यता देने का फैसला किया।