24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
चुनौतियों से भरी है 'मियां' की तीसरी पारी
13-05-2013

इस्लामाबाद। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) को तीसरी बार जनता ने सिर आंखों पर बिठाया है। पाकिस्तान के एतिहासिक आम चुनाव में पीएमएल-एन सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी के मुखिया नवाज शरीफ, जिन्हें लोग प्यार से मियां पुकारते हैं, एक चुनौतीपूर्ण कार्यकाल का सामना करने जा रहे हैं। ध्वस्त अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार रूपी राक्षस, अमेरिका से बिगड़ते संबंध और मजबूत तालिबान के तौर पर आतंरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती से नवाज को तीसरे कार्यकाल में जूझना होगा। इस पल के लिए नवाज ने बहुत परेशानियां डोलीं और उन्हें 13 साल का लंबा इंतजार भी करना पड़ा। दूसरे कार्यकाल के दौरान तत्कालीन सेनाप्रमुख परवेज मुशर्रफ ने उनका तख्तापलट किया। शरीफ गिरफ्तार हुए, उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। हालांकि, बाद में एक समझौते के तहत मुशर्रफ ने शरीफ को उनके परिवार के 40 सदस्यों के साथ देश से निकाल कर सऊदी अरब भेज दिया। अब वही शरीफ सत्ता संभालने जा रहे हैं और उन्हें देश से निकालने वाले मुशर्रफ अपने फार्म हाउस में कैदियों सी जिंदगी बिता रहे हैं शरीफ की सत्ता के बारे में विशेषज्ञों ने आकलन किया है कि प्रजातंत्र के लिए यह धीमी लेकिन मजबूत शुरुआत है। देश के 66 साल के इतिहास में आधे से ज्यादा समय कमान सेना के हाथों में रही। अब शरीफ और फौज के बीच के संबंध पाकिस्तान की विदेश एवं सुरक्षा नीतियों का एजेंडा तय करेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि फौज के चलते उनकी जान पर बन आई थी पर उन्हें राजनीति में लाने वाली भी सेना ही थी। 272 सदस्यीय संसद में पीएमएल-एन 125 पर कब्जा जमाने जा रही है। इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ के पक्ष में बह रही हवा के बावजूद पार्टी का यह प्रदर्शन उल्लेखनीय है।

वह आसानी से गठबंधन सरकार बनाते दिख रहे हैं। नवाज कह चुके हैं कि वह देश को वहीं से आगे बढ़ाना शुरू करेंगे, जहां उन्होंने 1999 में छोड़ा था। वरिष्ठ कॉलम लेखक और टॉक शो चलाने वाले फारुख पिटाफी ने कहा कि शरीफ अच्छे से सेना के महत्व को जानते हैं। प्रजातंत्र को मजबूत करने के लिए वह सेना के साथ मिलकर काम करना सीख जाएंगे। शनिवार रात मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंधों को मजबूत करने की पूरी कोशिश की जाएगी। हमें कश्मीर समेत सभी मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना ही होगा। सभी पार्टियों को पीएमएल-एन के साथ बैठकर देश के समक्ष खड़ी चुनौतियों से निपटना का रास्ता तलाशना होगा। कुछ दिनों पहले उन्होंने पाकिस्तान तालिबान से शांति वार्ता का समर्थन भी किया था। शरीफ ने कहा था कि आंतरिक सुरक्षा के लिए तालिबान चुनौती बना हुआ है। हम चाहते हैं कि शांति वार्ता के लिए आगे आएं। उनकी समस्याओं को सुनकर कोई रास्ता निकाला जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि 13 सालों तक चुनौतियां झेलने के बाद शरीफ ज्यादा परिपक्व हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि उन्होंने कई बार संकट में फंसी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार को गिराया नहीं पढ़ें: रिजल्ट पर क्या बोलीं इमरान की तलाकशुदा पत्नी हालांकि, वह चाहते तो पीपीपी को कब की सत्ता छोड़नी पड़ती। उधर, पंजाब प्रांत में पीएमएल-एन दोबारा सत्ता में लौट रही है। इमरान की पार्टी उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा और पीपीपी सिंध में सरकार बनाएगी। ऐसे में शरीफ को केंद्र और प्रांतीय सरकारों के बीच अच्छे संबंधों की रूपरेखा तैयार करनी होगी। पीपीपी सरकार के दौरान केंद्र और राच्यों के संबंध कुछखास नहीं रहे। स्वयं पीएमएल की पंजाब सरकार भी कई बार राच्य की उपेक्षा का आरोप लगाती रही। उन्होंने बुलेट ट्रेन और हाईवे की सौगात देश को देने की घोषणा की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए धन जुटाना बहुत मुश्किल होगा।