17 February 2019



प्रादेशिक
हाईकोर्ट ने दिया बर्खास्त आईएएस दंपति को झटका
17-05-2013
हाईकोर्ट ने बर्खास्त आईएएस दंपति अरविन्द जोशी व टीनू जोशी को झटका देते हुए संपत्ति राजसात किए जाने आदेश पर रोक से इंकार कर दिया। मामला मध्यप्रदेश विशेषष न्यायालय अधिनियम-2011 की संवैधानिक वैधता को कठघरे में रखे जाने से संबंधित है। गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश कृष्ण कुमार लाहोटी व जस्टिस विमला जैन की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने पक्ष रखा। लोकायुक्त की ओर से अधिवक्ता आदित्य अधिकारी व केन्द्र शासन की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया राशिद सुहैल सिद्दीकी खडे़ हुए। तीनों ने अधिनियम व शासकीय कार्रवाई की वैधानिकता को दी गई चुनौती को निराधार करार दिया। इधर दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने राज्य शासन द्वारा गठित मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम की धारा-14 की वैधानिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने दलील दी कि राज्य सरकार इस अधिनियम की आड़ में मनमाने तरीके से संपत्ति राजसात नहीं कर सकती। चूंकि यह अधिनियम दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का हथियार बन सकता है अत: इसे निरस्त कर दिया जाना चाहिए। राज्य शासन व लोकायुक्त की ओर से तर्क दिया गया कि बर्खास्त आईएएस दंपति अरविन्द व टीनू जोशी के निवास पर 9 दिसम्बर 2010 को लोकायुक्त ने छापा मारा था। इस दौरान 4 करोड़ 40 लाख 94 हजार 84 रुपए की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ था। जिसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया। साथ ही राज्य शासन ने मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम-2011 के तहत काली कमाई को लोकहित में राजसात करने का नोटिस जारी कर दिया। यह कदम पूरी तरह वैधानिक है अत: इसे दी गई चुनौती बेमानी है। अतिरिक्त महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने दलील दी कि बिहार राज्य में भी भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए इसी तरह का कड़ा कानून बनाया गया है। जिसके खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में दायर याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सिलसिले में दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर स्टे देने से मना कर दिया है। लिहाजा, विचाराधीन याचिका में की गई स्टे की अंतरिम मांग भी नामंजूर किए जाने योग्य है।