19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
ईरान में राष्ट्रपति चुनाव से पहले कोमा में इंटरनेट
20-05-2013

तेहरान। ईरान में महमूद अहमदीनेजाद का उत्तराधिकारी चुने जाने के लिए अगले माह होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव से पहले देश में इंटरनेट एक तरह से \'कोमा\' में चला गया है। इंटरनेट सेवाएं अचानक धीमी होने का असर व्यापारिक गतिविधियों ही नहीं बैंक और यहां तक कि सरकारी दफ्तरों पर भी पड़ रहा है। माना जा रहा है कि अरब जगत के विरोध प्रदर्शनों में सोशल साइट्स की ताकत का अहसास कर चुकी सरकार के इशारे पर इंटरनेट पर पहरा बैठा दिया गया है। गौरतलब है कि पिछले चुनाव के बाद सोशल नेटवर्किंग साइटों पर धोखाधड़ी के दावों के बाद भारी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए थे। इस बार सरकार ने पहले ही इंटरनेट पर शिकंजा कस दिया है। कारोबार, बैंक और सरकारी एजेंसियां भी नेट धीमा पड़ जाने से परेशान हैं। स्थानीय मीडिया ने बताया कि इंटरनेट धीमा पड़ जाने का अधिकारी कोई कारण नहीं बता पा रहे हैं। हालांकि, वह मान रहे हैं कि इंटरनेट धीमा है। घनून डेली ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इंटरनेट कोमा में है। यह केवल ईरान में ही होता है। हर बार चुनाव आने के साथ इंटरनेट को जानबूझकर कमजोर कर दिया जाता है। फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब समेत दर्जनों विदेशी साइटों पर 2009 में अहमदीनेजाद के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही सेंसरशिप लागू कर दी गई थी। अहमदीनेजाद के चुनाव जीतने का विरोध कर रहे लोगों पर कड़ी कार्रवाई हुई थी। कई लोग मारे भी गए थे। ईरान में हॉलीवुड फिल्मों की अवैध डीवीडी बेचने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि अब डाउनलोडिंग लगभग असंभव हो चुकी है। देश में इंटरनेट चलाने वाली एक कंपनी ने बताया कि देशभर से शिकायतें आ रही हैं लेकिन हम कुछ भी करने में असमर्थ हैं। साइटें खोलना तो दूर की बात लोग ई-मेल भी चेक नहीं कर पा रहे हैं। देश में सत्ता का डर इस कदर है कि इंटरनेट के बारे में जानकारी देने वाला कोई भी अपना नाम नहीं बताना चाह रहा। देश में वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसकी मदद से लोग ईरान के बाहर के सर्वर से जुड़ कर इंटरनेट चला लेते थे। संसद की संचार समिति के अध्यक्ष रमजनाली सोभानी फर्द ने मार्च में ही इसकी घोषणा कर दी थी।