18 February 2019



प्रादेशिक
भाजपा ने अनिल दवे को सौंपा चुनावी प्रबंधन
20-05-2013
प्रदेश में आसन्न विधानसभा चुनाव में तीसरी बार विजय पताका फहराने भाजपा ने अपने चुनावी प्रबंधन का काम सांसद अनिल माधव दवे को फिर सौंप दिया है। इसके साथ ही पार्टी अपने चुनावी \'वार रूम\' को चाक-चौबंद करने में जुट गई है। इस बार भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इमेज को भुनाया जाएगा। आक्रामक ढंग से प्रचार और \'दिग्विजय राज\' याद दिलाने की रणनीति बनी है। एक पखवाडे़ से इस कैडर बेस पार्टी में चुनावी मैनेजमेंट को लेकर गंभीर स्तर पर विचार मंथन चल रहा है। सबको मनाओ काम पर लगाओ युक्ति के तहत चुनावी प्रबंधन में माहिर नेताओं की पार्टी में अचानक पूछ-परख बढ़ गई है। पर्दे के पीछे रहकर वर्ष 2003 और 2008 में विधानसभा की चुनावी जंग जीतने की कारगर रणनीति बनाने वाले राज्यसभा सांसद अनिल माधव दवे पर पार्टी ने तीसरी बार भरोसा जताया है। सत्ता और संगठन प्रमुखों के साथ अब उनकी ज्यादा मुलाकातें होने लगी हैं। यह बात अलग है कि तीन-चार साल तक अनिल दवे मुख्यधारा से दूर बने रहे। दूसरी बार सरकार बनने के बाद मप्र में उनके पास कोई काम नहीं रहा। लेकिन पिछले सप्ताह लू-लपट भरी दोपहरी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अचानक दोपहर में अनिल दवे के घर जा पहुंचे और 45 मिनट की चर्चा का लब्बो-लुआब यही रहा कि चुनावी नैया पार लगाना है। इसके बाद पार्टी के प्रदेश प्रभारी अनंत कुमार और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल के साथ भी चुनावी प्रबंधन और भावी रणनीति पर उनकी लंबी चर्चाएं हुई। रविवार को भी मुख्यमंत्री निवास में चुनावी प्रबंधन को लेकर तोमर, शिवराज और दवे के बीच करीब दो घंटे तक विचार मंथन चलता रहा। इसमें हारी हुई सीटों के अलावा कमजोर क्षेत्रों की रणनीति पर चर्चा की गई। पार्टी के सर्वे में जो विकल्प सुझाए गए हैं उनके मद्देनजर भी इन क्षेत्रों में खासतौर पर शिवराज की रथ यात्रा निकाली जाएगी। ग्वालियर कार्यसमिति में कार्यकर्ताओं की फौज को कमर कसने का फरमान भी दिया जाएगा। यह भी तय किया गया कि चुनावी कार्ययोजना के खास मुद्दों को कार्यसमिति के सामने रखकर चुनावी शंखनाद कर दिया जाए। इसके लिए पार्टी 2003 और 2008 की चुनावी तैयारियों के रिकार्ड भी खंगालने में जुट गई है।