17 February 2019



प्रादेशिक
फिर बढ़ सकता है गुजरात के शेरों का इंतजार
23-05-2013
गुजरात के गिर अभ्यारण के शेरों को मध्यप्रदेश में बसाने का मामला और भी आगे बढ़ सकता है। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के 15 अप्रैल के फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर करने के कारण बनी है। हालांकि अभी तक इस याचिका पर सुनवाई नहीं हुई है, लेकिन सरकारी एजेंसियों की नजर इस रिव्यू याचिका पर लगी हुई है। वहीं दूसरी ओर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सुस्त रवैए के चलते एक माह बाद भी गुजरात सरकार को गिर के शेर मप्र को देने के आदेश जारी नहीं हो सके हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को 6 माह में गुजरात के शेर को मप्र में बसाने का फैसला सुनाया है। वहीं पीके शुक्ला प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी मुख्यालय ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर पूछा है कि गुजरात के शेर को लाने में मप्र की किसी सहयोग की आवश्यकता हो तो बताएं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में की गई कार्यवाही की वर्तमान स्थिती की जानकारी भी मांगी है उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार का कहना है कि मप्र ने कोर्ट को गुमराह किया है याचिका में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी [एनटीसीए] की 2011 की रिपोर्ट का हवाला देकर मप्र को शेरों के लिए सुरक्षित प्रदेश बताया है, उसमें कहीं भी पालपुर कूनो का जिक्र नहीं है। ऐसे में मप्र को गिर के शेर देना जोखिम भरा हो सकता है। गुजरात की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन हाल फिलहाल मप्र में गुजरात के शेरों के आने का इंतजार वन्य प्रेमियों के लिए ओर लंबा हो गया है पीके शुक्ला, पीसीसीएफ वन्य प्राणी मुख्यालय ने बताया कि गुजरात द्वारा दायर की गई रिव्यू याचिका में क्या है यह आफिशियल कॉपी मिलने के बाद ही पता चलेगा। केन्द्र से चर्चा करने के बाद ही हम सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब पेश करेंगे।