15 February 2019



राष्ट्रीय
पार्टियों को छूट के लिए नहीं बदलेगा सूचना का अधिकार कानून
09-06-2013

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राजनीतिक दलों को छूट के लिए सूचना का अधिकार [आरटीआइ] कानून में बदलाव से इन्कार कर दिया है। सरकार का यह रुख मुख्य सूचना आयुक्त के उस फैसले के बाद आया है जिसमें पार्टियों को आरटीआइ कानून के दायरे में लाने की बात कही गई है। हालांकि, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने तो पारदर्शिता लाने के लिए आरटीआइ एक्ट की बजाय आयकर कानून में संशोधन का सुझाव दिया है। आरटीआइ के अनुपालन की नोडल एजेंसी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अधिकारी ने रविवार को संकेत दिया कि डीओपीटी राजनीतिक दलों को पारदर्शिता कानून के दायरे से बाहर रखने के लिए आरटीआइ एक्ट में संशोधन नहीं करेगा। विभाग का कहना है कि उसने सीआइसी के फैसले का अध्ययन किया है और इसमें हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। अगर कोई पार्टी फैसले से संतुष्ट नहीं है तो उच्चतर अदालत में गुहार लगा सकती है। अफसर का कहना है कि सीआइसी के फैसले पर कोई भी पार्टी उससे संपर्क करती है तो वह स्पष्टीकरण देने को तैयार है। दूसरी ओर, एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में तिवारी ने कहा कि अगर 20 हजार रुपये से कम के चंदे की जानकारी का सवाल है तो आयकर कानून में संशोधन के जरिये भी ऐसा हो सकता है। इसके लिए आरटीआइ के तहत पार्टियों को लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने सफाई दी कि पूरे देश में फैली पार्टी को छोटी राशि के रूप में बहुत बड़ी मात्रा में चंदा मिलता है, इसकी जानकारी दे पाना व्यावहारिक नहीं है। इसे व्यापक नजरिये से देखा जाना चाहिए। आयकर कानून में बदलाव कर भी इसकी जानकारी पाई जा सकती है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने भी सीआइसी के फैसले को जोखिम भरा दृष्टिकोण बताते हुए आगाह किया है कि इससे प्रजातांत्रिक संस्थानों को नुकसान पहुंचेगा।