22 February 2019



प्रादेशिक
दु:खी हूं कि टॉप 200 यूनिवर्सिटी में हमारी एक भी नहीं: प्रणब
09-06-2013
आईआईटी इंदौर की पहली बैच के पासआउट 99 विद्यार्थी डिग्री मिलने की खुशी में अपनी टोपियां हवा में उछालते उससे पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नसीहत दे डाली कि आपको समाज का कर्ज उतारना है। उन्होंने महात्मा गांधी को उदृत करते हुए कहा कि व्यक्ति सोचता है कि वह जो बना है वह खुद के कारण है। जबकि उसके निर्माण में समाज की भूमिका होती है। प्रथम दीक्षांत समारोह के मंच से राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे दु:ख होता है कि दुनिया की टॉप 200 यूनिवर्सिटी में देश का एक भी संस्थान नहीं है। जबकी हमने तो दुनिया को उच्चशिक्षा का अर्थ बताया है।

खंडवा रोड स्थित सिमरोल में आईआईटी के पहले दीक्षांत समारोह के मंच पर राष्ट्रपति पारंपरिक लाल गाउन [रॉब] पहने बैठे थे। राष्ट्रपति ने आईआईटी की पहली बैच के टॉपर अंकित गोयल को प्रेसिडेंट गोल्ड मैडल से सम्मानित किया। तीन अन्य विद्यार्थियों को उन्होंने सिल्वर मैडल पहनाएं। मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने दीक्षांत भाषण दिया तो शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान की तारीफ के साथ देश की उच्चशिक्षा की कड़वी सच्चाई से रबर भी करवाया। भाषण के दौरान राष्ट्रपति मुखर्जी का वित्त मंत्री वाला पुराना रूप भी नजर आया।

उन्होंने कहा प्रतिस्पर्धा के युग में कई बार आर्थिक ब़़ढत का नकारात्मक दौर भी आता है। मैं चार दशक तक वित्त मंत्री रहा ऐसे कई दौर आए लेकिन कभी निराश नहीं हुआ।

राष्ट्रपति ने कहा 1951 से 1979 के दौर में देश की आर्थिक विकास दर 3.5 प्रतिशत थी। 80 के दशक में दर सा़़ढे पांच प्रतिशत रही। 90 के दशक में हमने 6 प्रतिशत विकास दर हासिल की और बीते दस वर्षो में हमने 7.9 प्रतिशत विकास दर को छू लिया। चीन और कुछ देशों को छोड़कर दुनिया में किसी और देश ने विकास की ऐसी दर हासिल नहीं की। 2008-9 की सबसे ब़़डी मंदी में भी हम टिके रहे। ऐसे में मौजूदा 5 प्रतिशत की विकास दर के आंक़़डे के बाद ध्यान तो देना है लेकिन घबराना नहीं है।

ऑक्सफोर्ड-केंब्रिज से पहले

मुखर्जी ने कहा कि ऑक्सफोर्ड, केंब्रिज से वर्षो पहले 12वीं सदी में ही हमारे देश में तक्षशिला, नालंदा, सोनबिहार जैसे तमाम उच्चशिक्षा संस्थान रहे हैं। हमने तो दुनिया को उच्चशिक्षा का मतलब समझाया है। हममें क्षमता है, टैलेंट भी कोई कारण नहीं कि हम विश्व के सर्वेष्ठ संस्थान नहीं बन सके। भौतिक बढ़त जरूरी है लेकिन इनोवेशन इसकी चाबी है। राष्ट्रपति ने कहा कि जर्मनी में 21 प्रतिशत छात्र उच्चशिक्षा में पंजीकृत होते हैं अमेरिका में 34 प्रतिशत लेकिन भारत में सिर्फ 7 प्रतिशत। इसी तरह गरीबी की दर भी भारत में दूसरे देशों से ज्यादा है। मुखर्जी के अनुसार अभी देश में 2 करोड़ 50 लाख विद्यर्थी है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत हम इस संख्या को साढे़ तीन करोड़ तक पहुंचाना चाहते हैं।

मंच पर 24 लोग

सिमरोल में आईआईटी को आवंटित 500 एकड़ जमीन पर पहले दीक्षांत समारोह के लिए अस्थाई सभागृह बनाया गया था। मंच पर कुल 24 लोगों को जगह दी गई थी। मुख्यपंक्ति में सात कुर्सियां थी। मध्य में राष्ट्रपति मुखर्जी बैठे थे। उनके एक ओर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया व दूसरी ओर कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी के साथ राज्यपाल रामनरेश यादव, आईआईटी चेयरमैन अजय पिरामल व निदेशक प्रो.प्रदीप माथुर मौजूद थे।

राष्ट्रपति ने रखा अमावस्या का व्रत

आईआईटी की ओर से समारोह स्थल पर राष्ट्रपति मुखर्जी के लिए अल्पाहार और भोजन की विशेष व्यवस्था की थी। राष्ट्रपति की पसंद को ध्यान में रखते हुए मैन्यू में कुछ मांसाहारी व्यंजन भी शामिल किए थे। हालांकि मुखर्जी ने कुछ खाने से इनकार कर दिया। राष्ट्रपति के स्टाफ ने आईआईटी अधिकारियों से कहा कि राष्ट्रपति का अमावस का व्रत है। वे उज्जैन महाकाल में पूजा करेंगे उससे पहले कुछ नहीं लेंगे।