16 February 2019



राष्ट्रीय
बिहार में बढ़ती नक्सली हिंसा से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित
13-06-2013
नई दिल्ली, नीलू रंजन। बिहार में बढ़ती नक्सली हिंसा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का सबब बन गई है। जहां दूसरे राज्यों में नक्सली हिंसा में लगातार कमी आ रही है, वहीं बिहार में इसमें इजाफा हो रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पिछले कुछ सालों में बिहार में नक्सलियों के खिलाफ अभियान नहीं चलाने से उनके मंसूबे बढ़ते जा रहे हैं। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह फरवरी में ही बिहार के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर इसकी चेतावनी दे चुके थे। गृह मंत्रालय के पास मौजूद आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के शुरुआती पांच महीनों की तुलना में इस साल नक्सली हिंसा में बेहद कमी आई है। पिछले साल 31 मई तक नक्सली हिंसा की कुल 721 घटनाओं में 210 लोगों की जान गई थी। जबकि, इस साल 490 घटनाओं में 177 लोग मारे गए। इस दौरान बिहार में नक्सली हिंसा की घटनाएं तो लगभग पिछले साल जितनी ही रहीं, लेकिन उनमें मरने वालों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने आरोप लगाया कि जमुई में ट्रेन पर हमला नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का परिणाम है। यहां तक कि राज्य में भेजे गए अर्धसैनिक बलों का भी नक्सलियों के खिलाफ कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा। इसी कारण से फरवरी में गृह मंत्रालय ने राज्य से सीआरपीएफ की दो कंपनियां हटाने का फैसला किया था। लेकिन, स्थानीय स्तर पर बढ़ते विरोध को देखते हुए इसे वापस ले लिया गया। फरवरी में ही गृह सचिव ने राज्य के पुलिस महानिदेशक अभयानंद को पत्र लिखकर नक्सल विरोधी अभियान नहीं चलाने के लिए गहरी नाराजगी जताई थी। सिंह ने विस्तार से बताया था कि किस तरह राज्य में दिन-प्रतिदिन नक्सलियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। नक्सलियों के बारे में खुफिया सूचनाएं भेजे जाने के बाद भी राज्य पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सिंह ने पत्र में इसके गंभीर नतीजे की आशंका जताई थी। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जमुई में ट्रेन पर हमले ने केंद्र की आशंका को सही साबित कर दिया है।