15 February 2019



राष्ट्रीय
नीतीश पर जल्दी में नहीं कांग्रेस
13-06-2013
नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह]। नरेंद्र मोदी का कद बढ़ने को लेकर जदयू भले ही जल्द से जल्द भाजपा से नाता तोड़ने पर आमादा हो, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अगले कदम को लेकर कांग्रेस जल्दबाजी में नहीं है। लिहाजा, वह तब तक कोई हरकत नहीं करेगी, जब तक जदयू और भाजपा का रिश्ता टूट नहीं जाता। अलबत्ता, नीतीश के राजग से अलग होने पर उसने अपनी रणनीति का मोटा खाका तैयार कर लिया है। बिहार की राजनीति में प्रभावी असर रखने वाले नीतीश कुमार, राजद के लालू प्रसाद यादव और लोजपा के राम विलास पासवान को लेकर कांग्रेस का नजरिया साफ है। पार्टी का मानना है कि देश में राजनीति के दो ही विकल्प हैं। एक धर्मनिरपेक्ष दलों की राजनीति, जिसकी अगुआई कांग्रेस करती है। दूसरा गैर धर्मनिरपेक्ष दलों का जमावड़ा, जिसकी अगुआई भाजपा करती है। कांग्रेस के उच्चपदस्थ नेताओं का मानना है कि सांप्रदायिक ताकतों के साथ खड़ा न होने का रुख अख्तियार करते हुए नीतीश मोदी के विरोध में जहां तक चले गए हैं, वहां से लौटना आसान नहीं है। जब तक कि उनको साथ रखने के लिए भाजपा मोदी पर अपना फैसला बदल न दे और जब यह भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के लिए नहीं हुआ, तो नीतीश के लिए होने का सवाल ही नहीं है। कांग्रेस को भरोसा है कि भाजपा से अलग होने के बाद भी बिहार में नीतीश सरकार को कोई खतरा नहीं है। यहां तक कि विधानसभा में बहुमत साबित करने की नौबत आने पर भी लालू का राजद भाजपा के साथ खड़ा नहीं हो सकता। पार्टी का मानना है कि जिस सवाल पर नीतीश भाजपा से अलग होने की तरफ बढ़ रहे हैं, वह उन्हें धर्मनिरपेक्ष राजनीति के रास्ते पर ही ले जाता है। जदयू-भाजपा के रिश्ते खत्म होने की कगार पर पहुंचने को लेकर कांग्रेस के रुख पर कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा, \'यह उनका अंदरूनी मामला है। जब तक नीतीश या कोई पार्टी भाजपा से अलग नहीं हो जाती, कांग्रेस का कुछ भी बोलना उचित नहीं है। अभी बिहार में कांग्रेस की मानसिकता अकेले चलने की है। भविष्य में क्या होगा, यह कोई नहीं जानता। हमने झारखंड में भी झामुमो से तब तक कोई बात नहीं की, जब तक वह भाजपा से अलग नहीं हो गया। अब छह महीने बाद कुछ बातचीत शुरू हुई है।\' हालांकि, सूत्रों की मानें तो भाजपा से अलग होने पर जदयू किस तरफ जाए, इस पर भी दल में एक राय नहीं है। इसीलिए नीतीश तीसरे मोर्चे के सवाल पर अभी कुछ कहने से बच रहे हैं, जबकि जदयू महासचिव भाजपा से गठबंधन टूटने से पहले ही ममता बनर्जी से मिलने कोलकाता पहुंच गए।