17 February 2019



प्रादेशिक
भूले-बिसरे हिंदू वोटरों को रिझाएगी भाजपा
18-06-2013
मिशन 2013 की तैयारी में जुटी भाजपा ने अपने उपेक्षित हिंदू वोटरों को रिझाने की कवायद भी शुरू की है। भूले-बिसरे पारंपरिक व विचारधारा से जुड़े पुराने लोगों की नाराजगी दूर कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम चलाई जाएगी। इसके लिए संगठन के संपर्क कार्यक्रम तो चलेंगे ही साथ ही उन्हें आकषिर्षत करने सरकार की सांस्कृतिक उपलब्धियां भी गिनाई जाएंगी।

सत्ता में तीसरी बार काबिज होने के लिए भाजपा ने चुनावी प्रबंधन की दृष्टि से समाज के विभिन्न वर्गो को रिझाने की अलग--अलग कार्ययोजनाएं बना ली हैं। इस पर शीघ्र ही क्रियान्वयन शुरू होगा। पहली बार बने मतदाता, महिलाएं, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, सामाजिक संगठन, गायत्री परिवार जैसी संस्थाएं और सेवानिवृत कर्मचारी-अधिकारियों पर विशेषष फोकस किया जा रहा है। इनके अलावा जनसंघ के जमाने से पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहे ऐसे लोगों को भी ढूं़ढा जा रहा है जिन्हें पार्टी ने पिछले कई वर्षो से भुला दिया था। अब उन परिवारों को विचारधारा के नाम पर फिर से जोड़ने और जगाने का काम हाथ में लिया गया है। संघ से जुड़े एवं पार्टी के पुराने नेताओं का मानना है कि भाजपा की लोकप्रियता व जनाधार बढ़ने के साथ नए-नए लोग तो जुड़ते गए। लेकिन इस आपाधापी में विचारधारा व जनसंघ के निष्ठावान सैकड़ों परिवार पीछे छूट गए। इनमें ज्यादातर संख्या हिंदू वोटरों की है।

याद आए भूले-बिसरे

विधानसभा की चुनावी तैयारी के दौरान भाजपा को ऐसे भूले-बिसरे लोग याद आने लगे हैं। इसलिए उन्हें रिझाने के लिए कार्यक्रम और उपलब्धियों का ब्यौरा भी तैयार किया जा रहा है। पार्टी पदाधिकारी, प्रभारी और जिलाध्यक्षों के बीच विचार मंथन के दौरान भी इस मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इसके बाद सत्ता और संगठन प्रमुखों ने इस दिशा में भी सक्रियता बढ़ाने की पहल की है। पार्टी की आंतरिक बैठकों में पार्टी व संघ से जुड़े नेता भी ऐसे जनसंघियों और हिन्दू मतदाताओं की खोज-खबर लेने की जरूरत बता चुके हैं। इसलिए प्रदेश के हर जिले में ऐसे परिवारों को चिन्हित किया जाएगा। उनके पास जाने के पहले सांस्कृतिक क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का ब्यौरा तैयार कराया गया है जिनके नाम पर उन्हें फिर से पार्टी में जोड़ा जाएगा।

ऐसे कार्यो की होगी मार्केटिंग

विचारधारा से जुडे़ पुराने लोगों को रिझाने के लिए जिन चुनिंदा कामों की मार्केटिंग की जाएगी। उनमें देश का पहला गौ अभयारण्य, तीर्थ दर्शन योजना, परशुराम जयंती और गुड़ी पड़वा के अवकाश की घोषणा। हिन्दी, संस्कृत एवं बौद्ध विश्वविद्यालय, पवित्र नगरों का ऐलान, नर्मदा-शिप्रा लिंक योजना, नर्मदा शुद्धिकरण एवं लंका में माता सीता के मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रपये की मंजूरी का प्रचार भी होगा। साथ ही महापुरुषों में कबीर, चंद्रशेखर आजाद, झांसी की रानी, झलकारी बाई, रानी अवंती बाई के अलावा वनवासी नेताओं के स्मारकों की भी याद दिलाई जाएगी।