16 February 2019



राष्ट्रीय
उत्तराखंड: सीएम बोले, 1000 से ज्यादा लोगों की मौत
23-06-2013
उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या का अभी सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। रविवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी कहा इस आपदा में मरने वालों का सही आंकड़ा बता पाना अभी संभव नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी तक के जो आंकड़े मिले हैं उसके आधार पर मरने वालों की एक हजार से अधिक है। वहीं रविवार को उत्तराखंड में जगह-जगह पर रुक-रुक कर हो रही बारिश ने सेना की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुछ जगहों पर बारिश थमने के बाद राहत कार्य शुरू कर दिया गया है तो कुछ जगह पर इसमें बाधा आ रही है। केदारनाथ में बारिश रुकने के बाद सेना ने शवों को निकालने का काम शुरू कर दिया है। अभी तक 100 से ज्यादा शवों को निकाला जा चुका है। हालांकि यहां पर भी अभी रुक-रुक कर बारिश हो रही है। बारिश रुकने के बाद रुद्रप्रयाग में बचाव अभियान दोबारा शुरू किया गया है। मौसम विभाग ने एक बार फिर अगले 48 घंटों में बारिश होने की संभावना व्यक्त की है। इस बीच देहरादून में बारिश होने की वजह से यहां से हेलीकॉप्टर की उड़ानें रोक दी गई हैं। जगलचट्टी में फंसे यात्रियों को निकाला जा रहा है। मौसम खराब होने के कारण केदारनाथ क्षेत्र में ऊंचाई वाले स्थानों के लिए उड़ानें शुरू नहीं हो पाई हैं। बदरीनाथ क्षेत्र से 100 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। केदारनाथ व गरुड़चंट्टी के जंगलों में अभी भी करीब एक हजार यात्री फंसे हुए हैं। तेज बारिश की संभावना के मद्देनजर इन्हें फौरी राहत पहुंचाने के लिए आइटीबीपी के जवान पैदल रास्तों से चलकर उन तक पहुंचने के प्रयास में जुटे हैं। पुलिस अधीक्षक बीजे सिंह के मुताबिक बारिश के दौरान जो जहां फंसे हैं, उन्हें वहीं राहत पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उत्तरकाशी व चमोली जनपद में बारिश के चलते सुबह रेस्क्यू अभियान थम सा गया था। साढ़े दस बजे के बाद बारिश कुछ थमी तो रेस्क्यू अभियान में फिर से तेजी आ गई। रुद्रप्रयाग जनपद में सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा भोजन व पानी के पर्याप्त पैकेट गिराए गए हैं। लेकिन कड़ाके की सर्दी में लोगों का खुले आसमान के नीचे रहना दुश्वार होता जा रहा है। खराब मौसम के चलते जंगलचंट्टी में बनाए गए अस्थाई हेलीपैड तक पहुचने का रास्ता भी ध्वस्त हो गया। ऐसे में यदि वहां हेलीकाप्टर पहुंचता है, तो लोगों का हेलीपैड तक जाना भी मुश्किल हो गया। उधर, गौरीकुंड के समीप गौरीगांव में फंसे करीब सभी 1200 यात्री पैदल मागरें से होते हुए फाटा की तरफ कूच कर गए हैं। ऐसे में अब गौरीगांव में किसी के फंसे होने की सूचना नहीं है। रुद्रप्रयाग के पुलिस अधीक्षक बीजे सिंह के मुताबिक मौसम खराब होने से हेली रेस्क्यू की गति धीमी हुई है, लेकिन केदारघाटी के जंगलों में फंसे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए आइटीबीपी के जवान पैदल ही मौके के लिए निकल पड़े हैं। ज्यादा बारिश होने की स्थिति में फंसे लोगों के लिए वहीं पर रुकने की व्यवस्था के साथ ही भोजन, पानी व दवा आदि की व्यवस्था की जाएगी। बारिश के दौरान जो जहां फंसा है, उसके वहीं सुरक्षित रुकने का प्रबंध किया जाएगा। चमोली में बारिश थमने के बाद करीब चार घंटे देरी से हवाई रेस्क्यू शुरू हो पाया। यहां प्रशासन के चार, सेना के दो व एक पंजाब सरकार का हेलीकाप्टर रेस्क्यू में लगा है। बदरीनाथ, गोविंदघाट, पांडुकेश्वर, घांघरिया आदि स्थानों पर अभी भी करीब नौ हजार से ज्यादा लोग फंसे हैं। बदरीनाथ से पहले बीमार, बूढ़ों के साथ बच्चों व महिलाओं को सुरक्षित निकाला जा रहा है। गोविंदघाट में फंसे लोगों को पैदल व संपर्क मार्ग के साथ ही जहां सड़कें कुछ ठीक हैं, वहां से वाहनों के जरिये जोशीमठ लाया जा रहा है। चमोली के जिला आपदा नियंत्रण अधिकारी नंद किशोर जोशी के मुताबिक आगामी घंटों में और बारिश की संभावनाओं के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त खाद्यान्न पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तरकाशी में भी सात हेलीकाप्टर के माध्यम से हर्षिल, मनेरी आदि स्थानों पर फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तरकाशी से गंगोत्री तक गंगोत्री राजमार्ग करीब आठ स्थानों पर बंद है। साथ ही यमुनोत्री मार्ग भी तीन स्थानों पर बंद है। इन दोनों मार्ग पर करीब साढ़े चार हजार लोग फंसे हैं। यमुनोत्री मार्ग में फंसे लोग पैदल ही कूच कर रहे हैं। वहीं, गंगोत्री मार्ग पर मनेरी, हर्षिल से यात्रियों को निकालने के साथ ही हेलीकाप्टर से इन स्थानों पर खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है।