21 February 2019



मनोरंजन
विदेशी निवेशकों को सेबी की सौगात
26-06-2013

मुंबई। घरेलू पूंजी बाजार में ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बाजार नियामक सेबी ने कई नियमों को आसान कर दिया है। वहीं, घरेलू कंपनियों के लिए शेयर बायबैक के नियमों को कड़ा कर दिया है। मंगलवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड [सेबी] के निदेशक मंडल की हुई बैठक में ये फैसले किए गए। नए नियमों से विदेशी निवेशक देश में आसानी से रजिस्ट्रेशन करा पाएंगे और उन्हें मंजूरियां भी तेजी से मिलेंगी। सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में नए नियम काफी अहम साबित होंगे। पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर ये फैसले किए गए हैं। बाकी सिफारिशों को विचार के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। सेबी ने ये फैसले ऐसे समय लिए हैं जब रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट के साथ 60 के करीब पहुंच गया है। इस वजह से विदेशी संस्थागत निवेशक [एफआइआइ] भारतीय बाजार से अपना निवेश निकालने में जुटे हैं। सेबी के इन कदमों से देश में विदेशी निवेशकों के लिए सुरक्षित, आसान और आकर्षक माहौल बनेगा। नए नियमों के मुताबिक, अब एफआइआइ को सेबी में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही इनकी एक ही कैटेगरी होगी। एफआइआइ, सब अकाउंट, क्यूएफआइ को मिलाकर फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर [एफपीआइ] श्रेणी बनेगी। नए नियमों के तहत किसी सेक्टर में एफपीआइ की औसत हिस्सेदारी 24 फीसद से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इन्हें सिर्फ सूचीबद्ध कंपनियों में ही पोर्टफोलियो निवेश की इजाजत मिलेगी। नियामक ने 10 फीसद हिस्सेदारी तक के सभी निवेश को एक ही श्रेणी में रखा है। इससे ऊपर के किसी भी तरह के निवेश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश [एफडीआइ] माना जाएगा। इसके अलावा सेबी ने लघु, छोटे व मझोले उद्योगों [एमएसएमई] और स्टार्ट-अप्स को बिना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम [आइपीओ] लाए सूचीबद्ध होने की इजाजत दे दी है। सेबी के फैसलों का विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। बायबैक नियम हुए सख्त सेबी बोर्ड ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए शेयर बायबैक [पुनर्खरीद] के नियमों को सख्त कर दिया है। इसके तहत कंपनियों को बायबैक के लिए रखी गई राशि का 50 फीसद खर्च करना ही होगा। यह प्रक्रिया छह महीनेमें पूरी करनी होगी। साथ ही बायबैक का 25 फीसद फंड एस्क्रो अकाउंट में रखना होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनी को जुर्माना भी देना होगा। एक बायबैक के बाद अगले के लिए कंपनियों को दूसरे साल का इंतजार करना होगा। अक्सर कंपनियां अपने शेयरों के भाव बढ़ाने और नगदी का इस्तेमाल करने के लिए बायबैक के रास्ते का इस्तेमाल करती हैं। इसका फायदा आमतौर पर बड़े शेयरधारकों को ही मिल पाता है। शेयरों के दाम चढ़ते ही कंपनियां बायबैक बंद कर देती हैं। इससे छोटे निवेशकों को अपने शेयर बेचने का मौका नहीं मिल पाता है।