18 February 2019



प्रादेशिक
मप्र में शहरी वेतनभोगी कर्मी रोजाना कमा रहा है 436 रुपये
29-06-2013
विकास के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार चाहे जो भी दावे करे, लेकिन हकीकत की जमीन पर भाजपा शासित मध्यप्रदेश और गुजरात छत्तीसगढ़ से काफी आगे हैं। भारत सरकार के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा \'भारत में रोजगार और बेरोजगारी के प्रमुख संकेतक\' नामक जारी की गई रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे रिपोर्ट में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य सामने यह आया है कि मध्यप्रदेश के शहरी इलाकों में वेतनभोगी कर्मचारी प्रतिदिन औसतन 436 रुपये कमा रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह 322.84 रुपये और गुजरात में 319.71 रुपये है। शहरी क्षेत्रों में वेतनभोगियों का राष्ट्रीय औसत 450 रुपये है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में वेतनभोगियों की प्रतिदिन की औसत आय गुजरात और मध्यप्रदेश से कम है। अलबत्ता इन तीनों ही राज्यों में महिला वेतनभोगी कर्मचारियों की प्रतिदिन की औसत आय पुरुषों की तुलना में कम है। सर्वे से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में अस्थाई मजदूरों के खस्ता हाल हैं। उनकी हालत शहरों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा बदतर है। शहरी क्षेत्रों में सरकारी कार्यो से इतर अस्थाई मजदूर छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन औसतन 106.16 रुपये कमाता है, जबकि गुजरात का 144.52 रुपये और मध्य प्रदेश का 125.89 रुपये कमा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ का अस्थाई मजदूर प्रतिदिन औसतन 83.85 रुपये कमा रहा है जो कि देश में सबसे कम है। इस मामले में भी गुजरात और मध्यप्रदेश की स्थिति छत्तीसगढ़ से बेहतर है, जहां ग्रामीण क्षेत्र का अस्थाई मजदूर प्रतिदिन औसतन 112.84 रुपये और मध्य प्रदेश में 105.22 रुपये कमा रहा है। गौरतलब है कि यह आंकड़ा केरल में 314 रुपये हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों के प्रतिदिन की आय का राष्ट्रीय औसत 138.62 रुपये है। प्रति एक हजार लोगों में छत्तीसगढ़ में 541 लोग स्वरोजगार करने वाले, 362 लोग अस्थाई कर्मचारी एवं महज 97 लोग नियमित कर्मचारी हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार करने वालों का औसत देश में सबसे कम और बिहार के बराबर है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति एक हजार पर 581 लोग स्वरोजगार में लगे हैं एवं 378 अस्थाई कर्मचारी हैं। इनमें वेतनभोगियों की संख्या महज 41 है। ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्रति एक हजार पर 49 और गुजरात में 103 वेतनभोगी हैं। छत्तीसगढ़ को लेकर किए गए सेंपल सर्वे एक खास तथ्य यह भी उभरकर आया है कि राज्य में ग्रामीणों के लिए मनरेगा से होने वाली कमाई राज्य सरकार की अन्य किसी योजना में होने वाली कमाई से बेहतर है।