18 February 2019



प्रादेशिक
जेल में मोबाइल मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर लगा प्रश्न चिन्ह
01-07-2013
जेल में अपराधियों से मोबाइल मिलना एक शर्मनाक घटना हैं। सुधर जाओ, अब पहले जैसा कुछ नहीं चलेगा। डीजी जेल सुरेन्द्र सिंह ने सेन्ट्रल जेल के निरीक्षण के बाद अधिकारियों की बैठक में कुछ इस अंदाज में समझाइश दी। जेल में लगातार मोबाइल मिलने व सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगने से वह काफी दुखी और चिंता में थे। इस अवसर पर एसपी दिनेश नरगावे भी साथ थे।

रविवार को डीजी जेल सुरेन्द्र सिंह भोपाल से ग्वालियर आए और सुबह 11 बजे वह सेन्ट्रल जेल ग्वालियर में निरीक्षण के लिए पहुंचे। यहां जेल में निरीक्षण के बाद उन्होंने अधिकारियों की बैठक भी ली। जिसमें पिछले दिनों शार्प शूटर समीर जाट पर मोबाइल मिलने का मुद्दा छाया रहा।

सूत्रों के अनुसार बैठक में डीजी जेल सुरेन्द्र सिंह ने जेल में अपराधियों तक मोबाइल, गांजा व स्मैक पहुंचने पर नाराजगी जताई है। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में चेताया है कि वह पुराने ढर्रे पर काम नहीं करें। अब सुधर जाएं नहीं तो उनके लिए अच्छा नहीं होगा। इसके साथ ही जेल में सुरक्षा व्यवस्था को चौकस करने व अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

डीजी जेल सुरेन्द्र सिंह ने अधिकारियों की बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि जेल में सुरक्षा के इंतजामों को पुख्ता किया जाना है। इसीलिए डोर मैटल डिटेक्टर, हैंडली मैटल डिटेक्टर, पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों का प्रस्ताव पास हो चुका है। इस वित्तिय वर्ष में यह सभी काम पूरे करने का उद्देश्य निर्धारित किया गया है। जेल में मोबाइल व अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलने पर किए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं इस तरह की घटना से काफी दुखी व चिंतित हूं। जेल प्रशासन को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

सप्ताह में दो बार हो सकेगी मुलाकात

ऐसे कैदी जो गंभीर धाराओं में जेल में बंद हैं। उन्हें अब से सप्ताह में दो दिन अपने परिजनों से मिलने की इजाजत दी गई है। अभी तक ऐसे बंदियों को सप्ताह में सिर्फ एक बार ही परिजनों से मिलने की इजाजत थी। यह व्यवस्था शुरू की जा चुकी है।

मिलाई के लिए बनेगा अलग कक्ष

डीजी जेल ने बताया कि कैदियों की अभी तक मिलाई सेल में होती है। जिससे कुछ भी प्रतिबंधित सामग्री अन्दर जाने की संभावना बनी रहती है। पारदर्शिता लाने के लिए मिलाई के लिए अलग कक्ष का प्रस्ताव है। जिसमें बंदी व उसके परिजन के बीच एक कांच की दीवार होगी और वह कॉन्फ्रेस के जरिए बात कर सकेंगे। साथ ही इससे परिजनों को बंदियों से मिलने से पूर्व रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा।