24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
मुर्सी ने सेना का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया
03-07-2013

काइरो। मिस्र के राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी ने देश में चल रहे संकट को दूर करने के लिए सेना द्वारा दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि वह देश में सुलह के लिए अपनी योजना को लागू करेंगे। 2011 में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शनों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लोकतांत्रिक मिस्र 25 जनवरी की क्रांति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। इन प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को पद छोड़ना पड़ा था। कहा गया है कि चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, मिस्र में कदम पीछे ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मिस्र की सेना ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे में लोगों की मांगे पूरी नहीं की गई तो वह हस्तक्षेप करेगी। राष्ट्रपति मुर्सी के इस्तीफे की मांग को लेकर लाखों लोगों द्वारा सड़क पर प्रदर्शन करने के बाद सेना ने यह चेतावनी दी थी। सेना के बयान में कहा गया था, \'यदि इस अवधि तक लोगों की मांगे पूरी नहीं की जाती हैं तो सेना भविष्य के लिए रोडमैप की घोषणा करेगी। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुर्सी को फोन कर कहा है कि मिस्रवासियों की आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मिस्र में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। ह्वाइट हाउस की ओर से मंगलवार को कहा गया, \'ओबामा ने तंजानिया से मुर्सी से फोन पर बात की। उन्होंने मुर्सी से कहा कि अमेरिका मिस्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति वचनबद्ध है, लेकिन वह किसी एक दल या संगठन का समर्थन नहीं करता है।\' उधर मिस्र की शीर्ष अपील कोर्ट ने राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी द्वारा नियुक्त किए गए महाभियोजक को पद से हटाए जाने के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया है। न्यायिक सूत्रों और सरकारी समाचार एजेंसी मीना की ओर से यह जानकारी दी गई है।