16 February 2019



राष्ट्रीय
सस्ते अनाज के लिए करना होगा छह महीने का इंतजार
05-07-2013
खाद्य सुरक्षा का अध्यादेश शुक्रवार को भले जारी हो गया हो, लेकिन इस पर अमल छह महीने बाद ही हो पाएगा। इस कानून के क्रियान्वयन होने तक संसदीय चुनाव जोरों पर होगा। राज्यों को छह महीने का समय खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले लाभार्थियों को चिन्हित करने के लिए दिया गया। अध्यादेश पर विपक्ष के चौतरफा हमले का जवाब देने के लिए सरकार और कांग्रेस मैदान में उतर आई है। अध्यादेश के अनुच्छेद 10 में यह प्रावधान किया गया है कि अगले 180 दिनों के भीतर राज्य लाभार्थियों को चिन्हित कर लें। अध्यादेश पर अमल होने तक राशन प्रणाली को पूर्ववत ही रखें। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अध्यादेश पर मुहर लगा दी है। खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे संदेहों और एतराज को खारिज करते हुए कांग्रेस महासचिव व मीडिया विभाग के चेयरमैन अजय माकन और खाद्य मंत्री केवी थामस ने संयुक्त रूप से कहा कि इसके क्रियान्वयन के लिए न तो अनाज की कमी है और न ही धन की। दोनों नेताओं के अनुसार विपक्ष का कहना है कि खाद्य सुरक्षा कानून के चलते सरकारी खजाने पर कुल 1.24 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा है। लेकिन यह अधूरा तथ्य है। पूरी बात यह है कि खजाने पर केवल 23 हजार आठ सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जिसके लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2013-14 के आम बजट में 10 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान कर रखा है। पिछले वित्त वर्ष 2012-13 में कुल 85 हजार करोड़ रुपये की खाद्य सब्सिडी थी। विपक्षी दलों ने खाद्यान्न की उपलब्धता को लेकर भी सख्त आपत्तियां उठाई है। इन आपत्तियों पर कांग्रेस व सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि 6.12 करोड़ टन अनाज की जरूरत पड़ेगी। जबकि इसका लाभ देश की 81 करोड़ जनता को मिलेगी। इसका कोई असर राजकोषीय घाटे पर नहीं पड़ेगा। पिछले कुछ सालों में औसतन छह करोड़ टन से अधिक अनाज की खरीद हो रही है, जिसे आसानी से बढ़ाया जा सकता है। विपक्ष पर बरसते हुए माकन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून पर सरकार बजट सत्र में ही चर्चा कराना चाहती थी। लेकिन समूचा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। 13 जून को हुई कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नेहस्तक्षेप क रते हुए इस पर विपक्ष की राय लेने को कहा था। संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ और पार्टी नेता सुशील कुमार शिंदे ने इन दलों से चर्चा भी की। माकन ने इसे आम लोगों से जुड़ा मसला बताते हुए कहा कि यह सरकार का क्रांतिकारी फैसला है। यह पूछने पर कि इतनी जल्दी क्यों है के जवाब में उन्होंने कहा कि आखिर लेट ही क्यों किया जाए? खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करने के लिए राज्यों को छह महीने का समय दिया गया है। कानून के लागू होने के साथ ही देश की 67 फीसदी आबादी को तीन रुपये किलो चावल, दो रुपये किलो गेहूं और एक रुपये किलो मोटा अनाज मिलने लगेगा। इसमें गर्भवती और नवजात बच्चों वाली महिलाओं को विशेष तौर पर रियायती अनाज देने का प्रावधान है।