22 February 2019



प्रादेशिक
पाक जेल में कैद है डिंडौरी का आदिवासी युवक
05-07-2013
जिले के विकासखंड मुख्यालय करंजिया का एक आदिवासी युवक बुधराम [38] पाकिस्तान की लाहौर जेल में पिछले एक साल से बार्डर पार करने की सजा भुगत रहा है। वह अक्टूबर 2011 में घर से किसी को बताये बिना चला गया था। बुधवार को जब आईबी [इंटेलीजेंस ब्यूरो] की टीम उसके घर पहुंची, तब परिजनों को पता चला कि बुधराम पाक जेल में है। बुधराम पाकिस्तान कैसे पहुंचा, यह किसी को पता नहीं है। परिजन उसे विक्षिप्त बता रहे हैं। युवक के घर से जाने पर डिंडौरी में गुमशुदगी का मामला भी दर्ज नहीं हुआ है।

पंजाब से की थी सीमा पार

करंजिया के सुहारिन टोला निवासी बुधराम अक्टूबर 2011 के तीसरे सप्ताह में घर से लापता हो गया था। सूत्रों ने बताया कि मानसिक हालत ठीक न होने के चलते वह पंजाब से पाकिस्तान की सीमा में घुस गया। उसे 5 जुलाई 2012 को पाकिस्तानी फौज ने गिरफ्तार कर लिया। उस पर अवैध रूप से पाक सीमा में घुसने का मामला दर्ज किया गया। 10 जुलाई 2012 को पाक अदालत ने उसे एक साल कैद और एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माने की राशि अदा न करने पर तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा दी गई।

मां का रो-रोकर बुरा हाल

युवक का नाम बुधराम है, लेकिन पाक से जो पत्र आया है उसमें उसका नाम योगेश बताया गया है। हालांकि मां, पिता, भाइयों के नाम और पता सही हैं। यह जानकारी पाक गृह मंत्रालय ने भारतीय दूतावास को दी। इसके बाद से गृह मंत्रालय आईबी के माध्यम से जानकारी जुटा रहा है। आईबी टीम ने जब से बुधराम के परिजन को यह जानकारी दी, तभी से उसकी मां सुकलिया बाई का रो-रोकर बुरा हाल है।

फेल होने से हो गया था विक्षिप्त

बुधराम का जन्म एक जुलाई 1976 को करंजिया के सुहारिन टोला में हुआ। उसने 1995 में करंजिया हाईस्कूल से 10वीं की परीक्षा दी, लेकिन फेल हो गया। उसके बाद डिंडौरी से 1996 व 1997 में भी 10वीं की परीक्षा दी, लेकिन पास नहीं हो सका। इससे वह मानसिक तौर पर विक्षिप्त हो गया और यहां-वहां भटकने लगा। एक बार वह छत्तीसग़़ढ के सरगुजा और दूसरी बार अमरकंटक में मिला था।

परिवार की आर्थिक हालात खराब

बुधराम के पिता रमनू सिंह खेती का काम करने के साथ मजदूरी करते थे। उनके 6 बेटे व 1 बेटी थी। बुधराम सबसे छोटा बेटा है। उसकी मां की उम्र लगभग 70 वर्ष है। पिता और 6 भाइयों में से 2 की मौत हो चुकी है। बुधराम की मानसिक हालत बिग़़डने के कारण परिजन ने उसका विवाह भी नहीं किया था।

प्रतापसिंह मार्को [बुधराम का भतीजा] ने बताया कि पूरा परिवार यह सुनकर ही परेशान है कि चाचा के साथ पाकिस्तान की जेल में क्या होता होगा। हमारे पास इतना पैसा भी नहीं है कि हम प्रयास करें। कल सुबह ही परिवार के सब लोग सांसद बसोरी सिंह मसराम से मिलकर चाचा को वापस लाने की गुहार लगाएंगे।

सुकलिया बाई मार्को [बुधराम की मां] ने कहा कि दो तीन बार मेरा बेटा बिना बताये घर से चला गया था, लेकिन कुछ दिनों में उसे ढूंढ लेते थे। कई बार तो वह खुद ही घर आ गया। इस बार भी दीपावली के एक सप्ताह पहले घर से अचानक चला गया। बुधवार को जब साहब लोगों ने आकर मुझे बताया कि वह पाकिस्तान की जेल में है, मैं तभी से परेशान हूं। अब तो यही अंतिम इच्छा है कि मेरा बेटा वापस लौट आए।