17 February 2019



प्रादेशिक
राघवजी की जमानत अर्जी खारिज
12-07-2013
नौकर के साथ अप्राकृतिक कृत्य के आरोपी पूर्व वित्तमंत्री राघवजी की जमानत अर्जी गुरुवार को अदालत ने खारिज कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश संजीव कालगांवकर ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि राघवजी ने स्वेच्छा से समर्पण नहीं किया, बल्कि गिरफ्तारी से बचने और छिपने का प्रयास किया। आरोपी को रिहा करने की दशा में राजनीतिक व सामाजिक प्रभाव को देखते हुए उनके फरार होने व साक्ष्य को प्रभावित करने की संभावना है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने आदेश में कहा कि राघवजी के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध पुष्टि सीडी पर रिकॉर्ड की गई वीडियो रिकार्डिग है, जिसे उन्होंने कहीं भी चुनौती नहीं दी। आरोपी राजनीतिक, सामाजिक रूप से प्रभावशाली है और उसने सेवक की हैसियत से काम कर रहे व्यक्ति का शारीरिक शोषण किया है, जो स्वमेव गंभीर अपराध स्पष्ट करता है। समाज पर पडे़गा विपरीत प्रभाव अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ऐसे सामाजिक व नैतिक जीवन में जनसामान्य की अपेक्षाकृत अधिक सुचिता व शुद्धता अपेक्षित की जाती है। इन परिस्थितियों में आरोपी को जमानत का लाभ दिए जाने से समाज पर दूरगामी प्रभाव प़़डेगा। सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक रूप से प्रभावी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई न करने से न सिर्फ अपराध के शिकार बल्कि अन्वेषणकर्ता भी हतोत्साहित हो सकते हैं और यह वस्तुस्थिति न्याय प्रशासन के लिए घातक होगी। आपत्तिकर्ताओं को फटकार अदालत ने अपने आदेश में मात्र फरियादी राजकुमार दांगी की आपत्ति को ही स्वीकार किया है। अन्य आपत्तिकर्ताओं को फटकार लगाई गई है। इस संबंध में अदालत ने कहा है कि फरियादी के आलावा अन्य आपत्तिकर्ता सामाजिक हित के बजाय वैयक्तिक व राजनीतिक परिलाभ के दुराशय से प्रस्तावित किया जाना प्रकट होते हैं। इसलिए उन्हें आपत्ति पेश करने का अधिकार ही नहीं है।