19 February 2019



खेलकूद
विदेश में दो महीने, दो खिताब..यही है धौनी की 2015 ड्रीम टीम?
12-07-2013
पिछले दो महीने में जो कुछ हुआ वह महज एक इत्तेफाक नहीं था, और ना ही कोई आसान सफलता। टीम इंडिया ने जब 2011 में वनडे विश्व कप जीता था तब वह अपने घर में ही था, लेकिन इस बार विदेशों में लगातार दो बड़ी खिताबी जीत (चैंपियंस ट्रॉफी और ट्राई सीरीज) क्या इस बात की तरफ संकेत है कि 2015 विश्व कप (जो कि ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में है) के लिए माही की ड्रीम टीम लगभग यही होगी?

पहले इंग्लैंड में भारत ने मिनी विश्व कप यानी चैंपियंस ट्रॉफी में दुनिया की सभी शीर्ष टीमों के बीच खिताब अपने नाम किया। इस सीरीज में सभी युवा खिलाड़ियों का योगदान सराहनीय रहा। जाहिर है कि जब चयनकर्ताओं ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए एक युवा टीम का चयन किया तब टीम में अनुभव की कमी को लेकर कई लोगों ने आलोचना की थी, कुछ ने सहवाग को बाहर रखना गलत बताया तो कुछ ने गंभीर और भज्जी को, लेकिन धौनी के हौसले और उनकी अगुवाई ने इंग्लैंड की कठिन पिचों पर जो परचम लहराया वह काबिलेतारीफ रहा। चलिए, चैंपियंस ट्रॉफी तो हम जीत गए लेकिन एक बड़े टूर्नामेंट के बाद थकान के बावजूद टीम को अगली फ्लाइट पकड़कर वेस्टइंडीज रवाना होना पड़ा जहां मेजबान वेस्टइंडीज और पुराने दुश्मन श्रीलंका उसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। वेस्टइंडीज की पिचों पर भारत का इतिहास भी कुछ खास नहीं रहा है, ऐसे में डर था कि कहीं चैंपियंस ट्रॉफी के जश्न का मजा घर लौटते-लौटते फीका ना हो जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ..भारतीय टीम फिर विजयी रही और एक बेहतरीन कप्तान (धौनी), उनका विकल्प (कोहली) और पूरी युवा टीम ने शुरुआती हार के बावजूद ऐसी वापसी की जिसने सबको मानने पर मजबूर कर दिया कि टीम इंडिया ही है विश्व नंबर वन।

आज टीम में ऐसे गेंदबाज मौजूद हैं (भुवनेश्वर कुमार) जो विदेशी पिचों पर भी हमें जहीर खान की कमी महसूस नहीं होने दे रहे, हमारे पास ऐसे ओपनर मौजूद हैं (शिखर धवन-रोहित शर्मा) जो हमें सहवाग और गंभीर की कमी महसूस नहीं होने दे रहे..टॉप ऑर्डर से मिडिल ऑर्डर तक विराट, रैना, फिर हरफनमौला जडेजा जैसे कुछ ऐसा युवा टैलेंट मौजूद हैं जो धौनी का साथ कभी भी देने को तैयार हैं, जिसकी वजह से हमें काफी हद तक युवराज सिंह की कमी नहीं महसूस हो रही। स्पिन डिपार्टमेंट में जो काम भज्जी करते थे, वह अश्विन बखूबी कर रहे हैं और जो उम्मीद पार्ट टाइम स्पिनर युवराज से थी वह कमी जडेजा पूरी कर रहे हैं। ऐसे में धौनी भी शायद इस बात को ठान चुके होंगे कि अगले विश्व कप में तकरीबन 90 प्रतिशत टीम इसी टीम में से निकलेगी। जाहिर है कि अगर प्रदर्शन ऐसा ही रहा तो यह वनडे चैंपियन टीम ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड (विश्व कप 2015) में भी इतिहास रचेगी क्योंकि इसमें कोई शक नहीं कि अब विदेशी पिचें भय का कारण नहीं रही हैं।