15 February 2019



राष्ट्रीय
अखिलेश करेंगे मंत्रिमंडल में फेरबदल, 4 नए मंत्री बनेंगे
18-07-2013
सोलह माह पुरानी अखिलेश यादव सरकार के मंत्रिमंडल का तीसरा विस्तार/फेरबदल गुरुवार को सुबह दस बजे राजभवन में होगा। समझा जाता है कि दो कैबिनेट सहित चार अथवा पांच मंत्रियों को शपथ दिलायी जाएगी। कुछ मंत्रियों को प्रोन्नत भी किया जा सकता है। चर्चा कतिपय मंत्रियों की छुट्टी किए जाने की भी है लेकिन इस बारें में किसी तरह के स्पष्ट संकेत नहीं है। विधान सभा के चार सौ तीन सदस्यों की संख्या के आधार पर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री को मिलाकर 60 सदस्य हो सकते हैं। इस समय मुख्यमंत्री केअतिरिक्त सरकार में 17 कैबिनेट, पांच स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री और 33 राज्य मंत्री हैं। इस लिहाज से मुख्यमंत्री चार नए मंत्री शामिल कर सकते हैं। विगत नौ फरवरी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। प्रतापगढ़ की रानीगंज सीट से विधायक प्रो.शिवाकांत ओझा को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाए जाने की सम्भावना है। वह भाजपा सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। कुछ माह पहले तक प्रतापगढ़ से दो काबीना मंत्री सरकार में शामिल थे लेकिन कुंडा के तिहरे हत्याकांड [सीओ जियाउल हक हत्याकांड] के चलते रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और सुलतानपुर की महिला जिलाधिकारी पर की गई विवादित टिप्पणी के चलते राजाराम पाण्डेय को इस्तीफा देना पड़ा था। बलिया नगर सीट के विधायक नारद राय को भी मंत्री पद की शपथ दिलाए जाने के आसार हैं। नारद राय भूमिहार समाज से आते हैं और सरकार में इस समाज की नुमाइंदगी नहीं है। राय मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली पिछली सपा सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को हराकर देवरिया की पथरदेवा सीट से विधान सभा में पहुंचे शाकिर अली का शुमार भी मंत्री पद के सम्भावित दावेदारों में है। वह पहले भी मंत्री रह चुके हैं। जौनपुर की शाहगंज सीट के विधायक शैलेन्द्र यादव उर्फ ललई यादव तथा गाजीपुर की जहूराबाद सीट से विधायक सैयदा शादाब फातिमा को भी मंत्रिपद का दावेदार माना जा रहा है। शादाब फातिमा सपा में शिया समुदाय की अकेली विधायक हैं और शिया समुदाय के धार्मिक नेताओं द्वारा शियाओं का सरकार में प्रतिनिधित्व न होने की बात उठाए जाने के कारण उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। बुदेलखंड का सूखा भी हो सकता है दूर विपक्ष में रहते हुए बुदेलखंड के पिछड़ेपन को मुद्दा बनाकर तत्कालीन बसपा सरकार पर हमलावर रहने वाली सपा ने 15 मार्च 2012 को जब सरकार का गठन किया तो उसमें बुदेलखंड को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। तब उम्मीद की गई थी कि जब आगे मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तब बुदेलखंड को नुमाइंदगी मिल जाएगी लेकिन इस साल नौ फरवरी को जब विस्तार हुआ तब बुदेलखंड को फिर निराशा हाथ लगी। अब प्रस्तावित विस्तार को लेकर बुदेलखंड को फिर आशा जगी है। कोई कुर्मी कैबिनेट मंत्री नहीं यादव के बाद सर्वाधिक सशक्त और प्रभावी पिछड़ी जाति का दर्जा रखने वाली कुर्मी बिरादरी की कैबिनेट में कोई नुमाइंदगी नहीं है। भगवत शरण गंगवार स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री हैं जबकि नरेन्द्र वर्मा, सुरेन्द्र सिंह पटेल और राममूर्ति वर्मा राज्य मंत्री हैं। यादव बिरादरी के छह कैबिनेट मंत्री और दो राज्य मंत्री हैं। माना जाता है कि कुर्मी बिरादरी के मंत्रियों को प्रोन्नति मिल सकती है। भगवत शरण को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल सकता है तो पांच बार के विधायक नरेन्द्र वर्मा को स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है। प्रमोशन के तलबगार शाहजहांपुर की ददरौल सीट से विधायक और राज्य मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा 1989 में मुलायम सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वह तीन बार लोकसभा के लिए भी चुने जा चुके हैं। बाराबंकी की दरियाबाद सीट से केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के पुत्र को हराने वाले कृषि राज्य मंत्री राजीव कुमार सिंह छह बार के विधायक हैं। वर्मा और सिंह दोनों ही प्रमोशन के तलबगार हैं। इसी क्रम में पीलीभीत सीट के विधायक और राज्य मंत्री रियाज अहमद भी हैं जिन्होंने कुछ महीने पहले लखनऊ में एक प्रभावशाली मुस्लिम रैली आयोजित कर सपा नेतृत्व की शाबासी हासिल की थी और अब उनके समर्थकों को उनके प्रमोशन का इंतजार है।