17 February 2019



प्रादेशिक
15 साल बाद 80वें गवाह के रूप में पेश हुए मोहंती
19-07-2013
राज्य योजना आयोग के प्रमुख सचिव सुधी रंजन मोहंती गुरुवार को इंदौर की विशेष अदालत में हाजिर हुए। वे 15 साल पहले इंदौर की तीन मंजिला बिल्डिंग को बम विस्फोट से धराशायी करने के मामले में गवाह हैं। उस दौरान वे यहां के कलेक्टर थे।

उन्होंने कोर्ट में बयान दिया कि मना करने के बाद भी नगर निगम ने न सिर्फ इमारत बनाने की अनुमति दी, बल्कि कब्रिस्तान में अवैध तरीके से तीन मंजिला इमारत भी ख़़डी करवा दी। जब यह इमारत ढहाई गई थी तब श्री मोहंती इंदौर कलेक्टर थे। वे गवाहों की सूचि में 80वें नंबर पर हैं।

विशेष न्यायाधीश डीएन मिश्र ने मामले की सुनवाई की। आरोपी तत्कालीन सहायक यंत्री नित्यानंद जोशी, तत्कालीन बिल्डिंग ऑफिसर राधेश्याम शर्मा, तत्कालीन उपयंत्री मोहम्मद हनीफ, रमेश शोचे, गिरिश मुंजे, राजेश गुप्त सहित 11 आरोपी पेश हुए। तत्कालीन इंदौर कलेक्टर मोहंती ने बयान में कहा, नगर निगम के आला अधिकारियों ने मिलकर भ्रष्टाचार किया और कब्रिस्तान की भूमि पर तीन मंजिला इमारत का निर्माण होने दिया। उन्होंने कहा, मैं जुलाई, 1996 तक इंदौर का कलेक्टर था। अपने नजूल विभाग से भूमि का रिकॉर्ड को देखकर निगम आयुक्त एसबी सिंह को पत्र के माध्यम से अवगत कराया था।

पत्र में उल्लेख किया था कि 12/5 साऊथ तुकोगंज की भूमि नजूल रिकॉर्ड के अनुसार कब्रिस्तान में आती है। वहां निर्माण के संबंध में कोई एनओसी नहीं दी गई है इसलिए उस भूमि पर कोई निर्माण नहीं होने दें। यदि निर्माण किया गया हो तो उसे सात दिन के भीतर हटाने की कार्रवाई करें और सूचना दें।

मामले की विवेचना 6 अधिकारियों ने की थी, जिनके बयान होना बाकी है। ईओडब्ल्यू की ओर से वकील अश्लेष शर्मा व मुख्य आरोपी की ओर से राजेन्द्र शर्मा ने पैरवी की। अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

वे नहीं गिनते थे कब्रिस्तान

वकील राजेन्द्र-जब आप कलेक्टर थे तब ढक्कन वाला कुआं और पलासिया से गुजरे थे?

मोहंती-खामोश।

वकील अश्लेष-[आपत्ति लेते हुए] वे तो कई जगह से निकले होंगे। बेहतर है केस से संबंधित सवाल किया जाए।

राजेन्द्र-इंदौर में कुल कितने कब्रिस्तान हैं?

अश्लेष-केस का क्रबिस्तानों की संख्या से कोई लेना-देना नहीं है।

राजेन्द्र-अच्छा ये बताएं कि वो कब्रिस्तान किस धर्म का था जहां बिल्डिंग बनी थी?

मोहंती-18 साल पहले की बात है इतना याद नहीं है।

राजेन्द्र-यह बताएं कि..।

अश्लेष-[रोकते हुए] जज साहब, राजेन्द्र जी का मकान कब्रिस्तान के पास ही है इसलिए इनकी सुई कब्रिस्तान पर अटक गई है।

न्यायाधीश मिश्र-बस रहने दीजिए बहुत सवाल हो गए। केस के संबंध में कोई सवाल बचा हो तो करें।

ये है मामला

1996 में तीन मंजिला बिल्डिंग को बम से धराशायी किया गया था। ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच कर 1998 में 11 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। जांच में 11 अधिकारियों को भ्रष्टाचार का दोषषी पाया था। साथ ही कहा कि बिल्डिंग का निर्माण फर्जी तरीके से अनुमति लेकर किया था। बिल्डिंग की अनुमति सेबिस्टन माइकल ने ली थी। मामले में 150 गवाहों की सूची भी पेश की गई थी। विगत 15 सालों में कुल 80 गवाह बयान दे चुके हैं।

कई आला अधिकारी दे चुके बयान

बताया जा रहा है कि विशेष अदातल में भ्रष्टाचार के प्रकरण का यह पहला ऐसा मामला है जिसमें बड़ी तादाद में गवाहों की सूची पेश हुई है। गवाहों की सूची में अधिकतर आला अधिकारी हैं। इसमें वर्तमान धार कलेक्टर सीबी सिंह, वर्तमान शाजापुर कलेक्टर प्रमोद गुा, तत्कालीन निगम आयुक्त कैप्टन प्रकाश गुप्त, तत्कालीन कलेक्टर एम गोपाल रेड्डी के बयान हो चुके हैं।