16 February 2019



राष्ट्रीय
गुजरात में लोकायुक्त रोकने को मोदी ने खर्चे 45 करोड़
20-07-2013
लोकसभा चुनाव में भाजपा का चेहरा बन चुके गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन मॉडल पर प्रहार के लिए लोकायुक्त पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कांग्रेस को एक और मौका मिल गया है। मोदी को सांप्रदायिक ठहराने के साथ-साथ गुजरात के विकास मॉडल की धज्जियां उड़ाने में जुटी कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उनके खिलाफ आक्रमण और तेज कर दिया है। लोकायुक्त नियुक्त करने के खिलाफ गुजरात सरकार की तरफ से अदालतों में बार-बार जाने को मोदी का डर करार देते हुए कांग्रेस ने कहा कि खुद को बचाने के लिए उन्होंने 45 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर 2006 से ही विवाद चला आ रहा है। 1984 में बने गुजरात लोकायुक्त कानून के तहत राज्यपाल को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश और विपक्ष के नेता के साथ विमर्श करने का अधिकार है। यह व्यवस्था भाजपा की जोरदार पैरवी के बाद ही बनी थी। मगर अब लगातार अदालतों में शिकस्त खाने के बाद भी मोदी सरकार इसके खिलाफ पूरी ताकत झोंके हुए है। कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने इसे भ्रष्टाचार के राज खुलने का मोदी का डर करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को गुजरात सरकार की पुनरीक्षण याचिका भी खारिज कर दी है। इससे कांग्रेस को मोदी पर और ज्यादा खुलकर हमले का मौका मिल गया है। दरअसल, सात जून 2011 को लोकायुक्त के तौर पर गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने जस्टिस आरए मेहता का नाम सुझाया था। राज्यपाल कमलाबेन ने उसे मंजूरी दे दी थी। गुजरात सरकार इसके खिलाफ हर कोर्ट का चक्कर लगाकर भी राहत नहीं पा सकी। अब ताजा फैसले के ठीक दूसरे ही दिन भाजपा अभियान समिति के प्रमुख बने नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में अपनी टीम बनाई। इसी पर कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने तंज कसा, \'एक व्यक्ति जो कल दिल्ली में आकर अपनी टीम बनाता है, वह कैसा है उसका असली चेहरा दिखाने के लिए यह प्रेसवार्ता कर रहे हैं।\' उन्होंने कहा कि मोदी को जनता को जवाब देना होगा कि आखिर वह क्या छिपाना चाहते हैं जिससे लोकायुक्त से डर रहे हैं।