17 February 2019



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राज्यपाल विस अध्यक्ष को नहीं दे सकते निर्देश
20-07-2013
संसदीय कानून के अनुसार राज्यपाल विधानसभा का सत्र फिर से बुलाने के निर्देश विधानसभा अध्यक्ष को नहीं दे सकते। यह बात विधानसभा अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी ने राजभवन से बाहर निकलते हुए पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने दावा किया कि उनके तर्को से राज्यपाल रामनरेश यादव भी पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि मैंने राज्यपाल को काल शखधर की संसदीय नियम और सुप्रीम कोर्ट से लेकर गुजरात हाईकोर्ट के फैसले की प्रति भी दी है, जिनमें स्पष्ट लिखा है कि अध्यक्ष को सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का अधिकार है। इसमें यह भी उल्लेख है कि सदन के भीतर अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा। विपक्ष ने नहीं दिया जोर रोहाणी ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को सदन में हुई कार्यवाही का रिकार्ड दिखाकर विस्तृत रूप से पूरा मामला समझाया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा शुरू की तो बीच में उपनेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी बोलने के लिए खडे़ हो गए। मैं उन्हें बैठने के लिए कहता, इससे पहले ही विपक्ष के विधायक आरिफ अकील ने उन्हें अपनी बात रखने का आग्रह किया। इसके बाद विधायक चौधरी ने सदन में प्रस्ताव पर जो बोला, उससे पूरा मामला ही पलट गया। विधायक चौधरी की जो भूमिका होनी चाहिए थी, वह नहीं थी। इस पर सत्तापक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को शून्य घोषित करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जनादेश पूरा सत्तापक्ष की ओर था, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष की ओर से अविश्वास पर चर्चा के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया। संसदीय मंत्री ने भी सदन की कार्यवाही स्थगित करने का प्रस्ताव रखा। ऐसी स्थिति में सत्र को अनिश्चित काल तक समाप्त करना मेरी मजबूरी थी। राज्यपाल सहमत रोहाणी ने दावा किया कि चर्चा के दौरान राज्यपाल ने यह स्वीकार किया कि अब इस मामले में कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि सारे लोग मुझसे बोल रहे हैं कि सत्र फिर से बुलवाओ, लेकिन मैं जानता हूं कि सत्र फिर से नहीं बुलाया जा सकता है।