16 February 2019



राष्ट्रीय
लालू को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बदले जा सकते हैं जज
23-07-2013
चारा घोटाले में आरोपी राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को फिलहाल राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को न सिर्फ उनके मामले में रांची की सीबीआइ कोर्ट के फैसला सुनाने पर रोक जारी रखी, बल्कि सुनवाई कर रहे जज को बदलने के भी संकेत दिए।

मालूम हो कि लालू के खिलाफ झारखंड में रांची की विशेष अदालत में चारा घोटाले का मामला लंबित है जिसमें उन पर 1990 में चाईबासा की ट्रेजरी से 37.7 करोड़ रुपये निकालने का आरोप है। उस समय लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे और चाईबासा अविभाजित बिहार का हिस्सा था। इस मामले में सीबीआइ अदालत के विशेष न्यायाधीश ने ट्रायल पर सुनवाई पूरी करके अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।

विशेष जज गत 15 जुलाई को फैसला सुनाने वाले थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नौ जुलाई को ही उस पर रोक लगा दी थी। लालू ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर विशेष जज पर पक्षपाती होने की आशंका जताते हुए मामले का ट्रायल किसी और जज की अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।

मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को लालू की याचिका पर सुनवाई छह अगस्त तक टालते हुए ट्रायल कोर्ट के जज बदलने के संकेत दिए। मामले पर जैसे ही सुनवाई शुरू हुई सीबीआइ ने लालू की याचिका का जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से कुछ और समय मांगा। इसी दौरान जदयू सांसद राजीव रंजन उर्फ लल्लन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने उन्हें भी पक्षकार बनाने का आग्रह किया। कुमार ने कहा कि वे इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता हैं। उन्हीं की जनहित याचिका पर चारा घोटाले के इस मामले की जांच शुरू हुई थी, इसलिए उन्हें भी पक्षकार बनाया जाए। रंजीत कुमार की दलील थी कि इस मामले में 275 दिन सुनवाई हुई, तब लालू ने जज पर आपत्ति क्यों नहीं उठाई। लालू सुनवाई में देरी कराना चाहते हैं। लालू के वकील जेठमलानी ने राजीव रंजन को पक्षकार बनाए जाने का विरोध किया।

जेठमलानी ने कहा कि सुनवाई कर रहे जज पक्षपाती लगते हैं, क्योंकि जब मामले पर बहस चल रही थी तभी उन्होंने पक्षकारों को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश देते हुए फैसले के लिए 15 जुलाई की तिथि निश्चित कर दी थी। उन्होंने कहा कि सुनवाई कर रहे जज की जदयू नेता और बिहार के शिक्षामंत्री पीके साही से रिश्तेदारी है। जज की बहन की शादी साही के परिवार में हुई है। साही उनके मुवक्किल के राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। पीठ ने उनकी दलीलें सुनने के बाद जज बदलने के संकेत देते हुए कहा कि जज पर बहुत हल्का सा प्रभाव हो सकता है। अगर सभी पक्ष जज बदलने पर राजी हों तो यह कोर्ट ट्रायल दूसरे जज को स्थानांतरित कर सकता है, अन्यथा हाई कोर्ट जज तय करेगा। पीठ ने सीबीआइ को इस बावत निर्देश लेने का समय देते हुए मामले की सुनवाई छह अगस्त तक टाल दी।