15 February 2019



राष्ट्रीय
जांबाज व जिंदादिल इंसान थे इंस्पेक्टर मोहनचंद
25-07-2013
बटला हाउस मुठभेड़ में शहीद हुए दिल्ली पुलिस के रणबांकुरे मोहनचंद शर्मा जांबाज होने के साथ बेहद जिंदादिल इंसान भी थे। उन्हें कुल 150 पुरस्कारों से नवाजा गया। मरणोपरांत उन्हें राष्ट्रपति ने अशोक चक्र से सम्मानित किया।

मोहनचंद ने जिन बड़े मामलों को सुलझाया, उनमें सन 2000 में लाल किला गोली कांड, 2001 में संसद भवन पर हमला व 2005 में दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाके आदि शामिल हैं।

स्पेशल सेल के एक इंस्पेक्टर के मुताबिक 2006 में मोहनचंद की टीम ने हजरत निजामुद्दीन इलाके में लश्कर ए तैयबा के दो आतंकियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनके कब्जे से चार किलोग्राम आरडीएक्स, चार डिटोनेटर व 50 हजार रुपये मिले थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस टीम ने उनके साथी लश्कर के ऑपरेशनल चीफ मुहम्मद इकबाल उर्फ अबू हमजा को मुठभेड़ में मार गिराया था।

आतंकियों के ठिकानों तक पहुंचने व उनकी गिरफ्तारी के लिए मोहनचंद का नेटवर्क काफी मजबूत था। इसी वजह से वह आइबी के सीधे संपर्क में रहते थे।

जन्म -23 सितंबर, 1965, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

शिक्षा- बीए

दिल्ली पुलिस में भर्ती- 26 जून, 1989 में बतौर सब इंस्पेक्टर

आउट आफ टर्न प्रमोशन- 1995 में इंस्पेक्टर बने

आतंकी ऑपरेशन- 35 ढेर, 80 गिरफ्तार

कुख्यात अपराधियों पर लगाम- 40 ढेर, 120 पकड़े

वीरता पुरस्कार -2001 से 2008 तक छह वीरता पुरस्कार

शहीद-19 सितंबर, 2008 को बटला हाउस मुठभेड़ में आतंकियों की गोली से मौत

अशोक चक्र-26 जनवरी, 2009 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने मरणोपरांत उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया।

कुल पुरस्कार मिले- 150