21 February 2019



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विशेष सत्र पर कानूनी राय सरकार के पक्ष में
30-07-2013
राज्यपाल रामनरेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने संबंधी पत्र का जवाब देने की तैयारी में जुटी सरकार को कानूनी राय का भी साथ मिल गया है। अभी तक जितने विधि विशेषज्ञों से राय ली गई है वह सरकार के साथ हैं जिसमें विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का अधिकार राज्यपाल को नहीं होने का मत व्यक्त किया गया है। सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट में विधि विशेषज्ञों की राय पेश की जाएगी। कैबिनेट की मुहर के बाद राजभवन को पत्र के जरिए मंत्रिमंडल की भावना से अवगत कराया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक सरकार राज्यपाल के सुझावनुमा पत्र के बावजूद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए राजी नहीं है लेकिन वह राज्यपाल की राय को सीधे-सीधे खारिज करके नए विवाद को जन्म भी नहीं देना चाहती है। इसलिए पत्र का जवाब देने के लिए कानूनी राय ले रही है। इसके लिए सरकार के नुमाइंदों ने किसी एक की राय पर भरोसा करने की जगह कई लोगों से संपर्क साधा है।

सोमवार को होने जा रही मंत्रिपरिषद की बैठक में विधि विशेषज्ञों की राय को विचार के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट में इन सलाहों पर चर्चा के बाद जो निष्कर्ष निकलेगा उसे पत्र में ढालकर राजभवन भेजा जाएगा।

रविवार को चला मंथन का दौर

राज्यपाल के पत्र का जवाब देने के लिए मंथन का दौर रविवार को भी चलता रहा। इसका केंद्र मुख्यमंत्री निवास बना। सुबह पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने मुख्यमंत्री निवास पहुंचे थे। इसके बाद बैठकों को दौर शुरू हो गया। इसमें मुख्य सचिव आर परशुराम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव विधि केडी खान और विधानसभा के प्रमुख सचिव राजकुमार पांडे ने शिरकत की। इसमें राज्यपाल के पत्र से उपजे हालातों पर विचार करने के साथ जवाब के बिन्दुओं पर चर्चा की गई।

संविधान विशेषज्ञों से भी मांगी राय

सुप्रीम कोर्ट में संविधान से जु़़डे मसलों पर पैरवी करने वाले नामचीन वकीलों की सलाह को भी कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यदि सहमति बनी तो जरूरत के मुताबिक इन्हें राज्यपाल को भेजे जाने वाले पत्र में शुमार किया जा सकता है।

विस सचिवालय ने साधी चुप्पी

विधानसभा के विशेष सत्र से जुड़ा मामला होने के बावजूद विधानसभा सचिवालय ने इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साध ली है। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इस बारे में चर्चा करने से कतरा रहे हैं। यही रणनीति विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहणी ने भी अपनाई है। वे भी पूरे मामले को सरकार और राज्यपाल से जुड़ा बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि परदे के पीछे सचिवालय भी सक्रिय है। कुछ राज्यों के विधानसभा सचिवों से इस मसले पर सलाह-मशविरा किया गया है।