24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
जनता के दिलों में पाकिस्तानी रेंजर्स की दहशत
01-08-2013

कराची। पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने अर्धसैनिक बलों के रेंजरों को देश के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने वालों की जगह खौफ का एजेंट करार दिया है। विशेष रिपोर्ट में एचआरसीपी ने कहा कि कई मौकों पर रेंजरों ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया और अपहृत लोगों के खिलाफ आरोपों का खुलासा तक नहीं किया। यह रिपोर्ट उन 11 मामलों के अध्ययन पर आधारित है जिनमें रेंजरों द्वारा अपहरण, हत्या और यातना दी गई।

सार्वजनिक की गई इस रिपोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा किया गया है। इसमें कहा गया है कि एफआइआर दर्ज करने में पुलिस हीलाहवाली करती है। कोर्ट के हस्तक्षेप पर ही वह केस दर्ज करने को बाध्य होती है। एचआरसीपी सिंध के अध्यक्ष अमर नाथ मोटूमल ने कहा कि शहर में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में रेंजर पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अब वे निदरेष लोगों की जान ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अपने कर्मियों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने में नाकाम रही पुलिस, सुरक्षा बलों के विरुद्ध कार्रवाई में अदालतों की अहम भूमिका हो सकती है। एचआरसीपी की टीम उन लापता लोगों के परिजनों से मिली, जिन्हें कथित तौर पर रेंजरों द्वारा उठाया गया। पुलिस के पास इनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं पाया गया।

भारत के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की जिम्मेदारी संभालने वाले पाकिस्तानी रेंजरों की अतिरिक्त तैनाती कराची और लाहौर में आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से हुई है। ये सीधे गृहमंत्री के नियंत्रण में आते हैं, लेकिन इनका संचालन सेना करती है।

भारत-पाक को सता रहा आतंकवाद बढ़ने का डर

वाशिंगटन। एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि भारत और पाकिस्तान को यह डर सता रहा है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान में अस्थिरता से दोनों देशों में आतंकवाद बढ़ सकता है।

रक्षा मंत्रलय में एशिया प्रशांत सुरक्षा मामलों के कार्यवाहक सहायक मंत्री पीटर लेवॉय ने कहा कि अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि आगामी वर्षो में अफगानिस्तान में भारत और पाकिस्तान अहम भूमिका निभाएंगे। अफगानिस्तान को लेकर भारत काफी चिंतित है। उसे डर है कि अफगानिस्तान में थोड़ी सी स्थिरता आने के बाद वहां आतंकवाद बढ़ने पर आतंकवादी कहां जाएंगे, क्या वे भारत को निशाना बनाएंगे? इसी डर से पाकिस्तान भी चिंतित है। उसे लग रहा है कि अफगानिस्तान से आतंकी उसके यहां प्रवेश कर जाएंगे।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में सुरक्षा हालात का पड़ोसी देशों पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे हालात में इस क्षेत्र के देशों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। मध्य और उत्तरी एशिया के देशों के साथ रूस और चीन इससे अछूते नहीं हैं। सबसे ज्यादा डर भारत और पाकिस्तान में है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने यहां लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहा है।

अशांत पश्चिमी हिस्से में उसके करीब डेढ़ लाख सैनिक आतंकवाद से मुकाबला कर रहे हैं। लेवॉय ने कहा कि हम कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय मसले के रूप में देखते हैं। भारत व पाकिस्तान को ही इसका समाधान निकालना है। इस मुद्दे को लेकर कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर वर्षो से हिंसा जारी है, जो अफसोसजनक है।

दुश्मन देश नहीं रहा भारत

नई दिल्ली। पाकिस्तान की पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री शेरी रहमान के मुताबिक भारत अब पाकिस्तान के लिए प्रमुख दुश्मन देश नहीं रहा।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान रहमान ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान में हो रहे आंतरिक बदलावों से सोच में परिवर्तन आ रहा है।

शेरी रहमान ने कहा, \'पाकिस्तान में फिलहाल बदलाव की बयार चल रही है। आंतरिक बदलाव देश की नीतियों को निर्धारित कर रहे हैं, जिससे पुरानी सोच में भी बदलाव हो रहा है। भारत अब पाकिस्तान के लिए प्रमुख दुश्मन देश नहीं रहा।\' हालांकि, उन्होंने सावधान किया कि मीडिया में दोनों देशों के बीच वर्षो से चली आ रही कटुता को पेश करने के कारण भारत और पाकिस्तान के भविष्य को नुकसान पहुंच सकता है।

इस मौके पर शेरी रहमान ने लंबे समय से लंबित मामलों को निपटाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत पर जोर दिया। पूर्व मंत्री के मुताबिक दोनों देश बहुत सारे शर्तो के साथ बातचीत की मेज पर आते हैं। पाकिस्तान इस स्थिति को बदलने का इच्छुक है। यह समाज और सरकार दोनों के स्तर पर हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देश दक्षिण एशिया को नया रूप देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।