16 February 2019



राष्ट्रीय
जया ने कहा, खाद्य सुरक्षा अध्यादेश वापस ले सरकार
03-08-2013

चेन्नई। मनमोहन सरकार की कटु आलोचक मानी जाने वाली तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता को खाद्य सुरक्षा अध्यादेश फूटी आंख भी नहीं सुहा रहा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर उन्होंने इस अध्यादेश को फौरन वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है, \'यह अध्यादेश तमिलनाडु के लिए खाद्य असुरक्षा के हालात पैदा करने वाला है।\' जया ने पीएम से आग्रह किया है कि वह राज्य की चिंता दूर करते हुए इस अध्यादेश की जगह संशोधन के साथ एक ऐसा विधेयक संसद में पेश करें, जिससे तमिलनाडु के हितों की पूर्ति हो। शुक्रवार को जया ने पीएम को पत्र लिखकर खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनके अनुसार, \'केंद्र ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए हड़बड़ी में इस अध्यादेश को लाने का काम किया है। इसमें सभी को भोजन की गारंटी देने का वादा तो किया गया है। लेकिन दुर्भाग्य से यह तमिलनाडु जैसे राज्यों के लिए अभिशाप साबित होने जा रहा है। इसे हमारे यहां खाद्य असुरक्षा की स्थिति पैदा होने के आसार हैं।\' अध्यादेश की जगह लेने के लिए संसद में पेश होने वाले प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक में जयललिता ने कई संशोधन करने का सुझाव दिया है। अध्यादेश की धारा आठ में एक उपधारा जोड़ कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि खाद्य सुरक्षा कानून के कारण अंत्योदय, बीपीएल और एपीएल श्रेणियों के तहत राज्यों को मिल रहे खाद्यान्न के कोटे में कोई कमी नहीं आएगी। उन्हें पहले की ही भांति खाद्यान्न की आपूर्ति जारी रहेगी। जया ने खाद्य सुरक्षा के दायरे में आने वाली शहरी आबादी की तादाद को प्रस्तावित पचास फीसद से अधिक करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी जिस दर पर लोगों को खाद्यान्न मुहैया कराने का प्रस्ताव किया है, वह केवल तीन वर्षो के लिए ही न हो। बल्कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत हमेशा इसी दर पर खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री के मुताबिक अध्यादेश के प्रावधानों के चलते तमिलनाडु की केवल 62.55 प्रतिशत ग्रामीण और 37.79 फीसद शहरी आबादी ही खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आएगी। इसके चलते राज्य की प्रति माह खाद्यान्न आपूर्ति में एक लाख टन की कमी आ सकती है। वर्तमान में केंद्र से तमिलनाडु को हर महीने 2.96 लाख टन की खाद्यान्न की आपूर्ति की जाती है।