21 February 2019



प्रादेशिक
वैकल्पिक माना जाएगा गीता का पाठ
06-08-2013
मदरसों में गीता पढ़ाने पर मचे बवाल के बाद राज्य की शिवराज सरकार रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है। सरकार ने साफ किया है कि जिन कक्षाओं की उर्दू पाठ्यपुस्तकों में इन पाठों को शामिल किया गया है, उनमें परीक्षा के आधार पर कक्षा में रोकने का प्रावधान नहीं है। फिर भी यदि किसी छात्र या छात्रा को इन पाठों के प़़ढने में रूचि नहीं है तो इन पाठों को वैकल्पिक माना जाएगा। सरकार ने यही नीति सूर्य नमस्कार के लिए भी अपनाई थी।

सरकार ने कहा कि स्कूली पुस्तकों को समावेशी बनाने की दृष्टि से गीता के अलावा अनेक धर्मों, संप्रदायों के विषय भी विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन हेतु शामिल किए गए हैं। जिसमें पैगम्बर हजरत मोहम्मद की जीवनी, वाकया-ए-कर्बला और गुरू नानक देव, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, क्राइस्ट, गरीब नवाज ऑफ अमेर पर प्रोजेक्ट कार्य दिए गए हैं। विभिन्न कक्षाओं की पुस्तकों में क्रिसमस का तोहफा, बीवी फातिमा की जीवनी, होली, ईद, दीवाली, राखी, ईदुज्जाुहा, ओणम, क्रिसमस, दशहरा, गुरू पर्व, महावीर जयंती, बुद्ध जयंती, लोहड़ी आदि त्यौहारों पर जानकारी कविता, कहानी एवं पाठ के रूप में शामिल है। कक्षा 11 में बिशप्स केंडल स्टिक्स वाला पाठ भी है। ईदगाह पर भी पाठ इन पुस्तकों में शामिल है। ईसाई सज्जान दीनबंधु एण्ड्रूज का सेवा भाव प्रेरक प्रसंग के रूप में दिया गया है।

हाई कोर्ट ने कहा, गीता भारतीय दर्शन मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जनवरी 2012 में मध्यप्रदेश के स्कूलों में गीता-सार पढ़ाए जाने के शासन के निर्णय के विरुद्ध कैथोलिक बिशप कौंसिल द्वारा याचिका दायर किए जाने पर व्यवस्था दी थी कि गीता मूलत: भारतीय दर्शन की पुस्तक है, न कि भारत के धर्म पर। पाठ्य-पुस्तकों में गीता आधारित सामग्री का निर्णय भी नया नहीं है। वर्ष 2011-12 से गीता के व्यवहारिक एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित विभिन्न पाठ्य सामग्री, कक्षा 01 से 12 की भाषा की पुस्तकों में समाहित की गई है।