21 February 2019



प्रादेशिक
शरीफ साहब.. शराफत दिखाओ
09-08-2013

इंदौर। पड़ोसी का दुस्साहस कितना बढ़ गया और देश के रहनुमाओं का साहस इतना दयनीय हो गया कि यहां मोरारी बापू को भी गुरुवार को रामकथा छोड़कर बीच में कहना पड़ा-शरीफ साहब..शराफत दिखाओ, सिंह साहब..दहाड़ो..।

अचानक प्रसंग से हटकर बापू का इतना कहना था कि समूचा पंडाल देर तक तालियों से गूंजता रहा। फिर बापू ने नेताओं को रोका और मुस्कराते हुए तेज आवाज में पूछा-अरे! मैंने तो कुछ कहा ही नहीं, आप तालियां किस बात पर पीट रहे हैं? उनके यह कहते ही पंडाल में हंसी के फव्वारे फूट पडे़।

दृढ़ अंदाज में यह भी बोले बापू

मेरा बस चले तो रक्षा मंत्री का दफ्तर सीमा पर बनवा दूं

-मुझे पता है, मेरा बस नहीं चलेगा .. पर अगर मेरा बस चले तो मैं रक्षा मंत्री का दफ्तर बॉर्डर पर बनवा दूं। बिलकुल सीमा पर। अगर उन्हें संसद या दिल्ली में आना है किसी काम से, बेशक सेना के विमान से आ जाएं। मेरी समझ में नहीं आता कि रक्षा मंत्री का दिल्ली में क्या काम है? वहां सीमा पर फौज के साथ रहें रक्षा मंत्री। दरअसल पाकिस्तानी सेना द्वारा पांच भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद सरकार के नाकारापन पर अन्य देशवासियों की तरह बापू भी खासे नाराज हैं।

ये क्या बचपना है?

-गरीबी मानसिक होती है। बापू ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना इसे बेतुकी बात बताते हुए कहा -क्या बचपना है? लोग भूखे हैं और उन्हें तत्वज्ञान दिया जा रहा है। गरीबों और भूखे पेटों को रोटी चाहिए, उन्हें रोटी दो।