15 February 2019



राष्ट्रीय
शरीफ-मनमोहन की मुलाकात पर संशय के बादल, पर उम्मीद कायम
09-08-2013
पुंछ में पांच भारतीय सैनिकों की हत्या से बिगड़े माहौल से भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात पर संशय के बादल तो उमड़ आए हैं लेकिन दोस्ती के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। न्यूयार्क में मनमोहन सिंह-नवाज शरीफ की मुलाकात की जमीन तैयार करने के लिए पर्दे के पीछे तैयारियों पर ब्रेक नहीं लगे हैं। इसके लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं। हालांकि पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एनसी विज, पूर्व राजदूत जी पार्थसारथी, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सतीश चंद्र और आइबी के पूर्व प्रमुख अजीत डोवाल ने जनभावनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री से सितंबर में शरीफ से प्रस्तावित मुलाकात रद करने को कहा है।

पढ़ें : दुखी शरीफ चाहते हैं मनमोहन से मुलाकात

सूत्रों के मुताबिक, सितंबर से पहले दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के विशेष दूतों के बीच तालमेल व संपर्को के जरिये शरीफ व मनमोहन के मिलने की सूरत तलाशने का प्रयास होगा। भारत की ओर से प्रधानमंत्री के विशेष दूत एसके लांबा और उनके पाक समकक्ष शहरयार खान दोनों मुल्कों के बीच बातचीत की रुकी गाड़ी को पटरी पर लाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। सितंबर के तीसरे सप्ताह में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए अमेरिका रवाना होने से पहले माहौल को सुधारने की भी कवायद हो रही है। इस बीच, विदेश दौरे से लौटे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुई घटना पर शोक जताकर सकारात्मक संकेत भी दिए हैं।

पढ़ें : पाकिस्तान ने वायुसेना को तैयार रहने के लिए दिए निर्देश

लेकिन मौजूदा माहौल को देखते हुए भारत ने पाक की ओर से अगस्त के मध्य व सितंबर की शुरुआत में अधिकारी स्तर वार्ता के लिए आए प्रस्तावों को तो फिलहाल ठंडे बस्ते में डाला है। हालांकि पाकिस्तान यदि 26/11 की जांच के लिए न्यायिक आयोग को भेजता है तो उसके भारत आने में कोई अड़चन नहीं है। संबंध सुधार की कूटनीतिक कवायदों से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि शांति वार्ता का कोई बटन नहीं है, जिसे बंद या चालू कर दिया जाए। सतत और लंबे प्रयासों के बाद शिखर स्तरीय मुलाकात की स्थिति आती है। ऐसे में सरकार देश की भावनाओं को नजर में रखने के साथ ही दीर्घकालिक हितों को भी सामने रखेगी। मनमोहन-शरीफ मुलाकात की जमीन बनाने के लिए बीते तीन महीनों से काफी कवायदें चल रही थी। इस कड़ी में लांबा ने पहले पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की थी, वहीं शहरयार खान भी भारत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले थे।

पढ़ें : इतना सबकुछ हो गया, फिर भी पाक को गैस बेचने की है तैयारी

कूटनीतिक गलियारों में पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही उकसाने वाली कार्रवाई को सीमा पार पाक सेना और नवाज शरीफ सरकार के बीच शक्ति संतुलन की खींचतान के तौर पर भी देखा जा रहा है। 1999 में सेना के हाथों सत्ता से बाहर हुए शरीफ फौज पर नागरिक नियंत्रण की मंशा साफ कर चुके हैं। लेकिन पाक सेना न तो सत्ता से अपनी पकड़ खोने को तैयार है और न ही भारत के साथ संबंध पर नियंत्रण का अधिकार छोड़ने को राजी। लिहाजा पिछले कुछ महीनों से पाक सेना भारत के साथ सीमा तनाव को सुलगाने के साथ ही कश्मीर घाटी में भी आतंकवाद की आंच सुलगाने में लग गई है।