19 February 2019



राष्ट्रीय
आइएएस दुर्गा के जवाब का परीक्षण शुरू
19-08-2013
निलंबित आइएएस दुर्गा नागपाल के जवाब का नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने परीक्षण शुरू कर दिया है। जिस जल्द निर्णय होने के आसार हैं।

प्रदेश सरकार ने 27 जुलाई की देर रात गौतमबुद्धनगर की एसडीएम (सदर) दुर्गा नागपाल को निलंबित किया था। उन पर बिना विधिक प्रक्रिया के मस्जिद की एक दीवार गिराने का आरोप था, इससे इतर विपक्षी दलों ने खनन माफिया के दवाब में कार्रवाई का आरोप लगाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था।

आइएएस के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में विरोधी दलों के हमले के बीच शासन ने चार अगस्त को दुर्गा नागपाल को आरोप पत्र थमा दिया। उनसे 15 दिनों के अन्दर जवाब मांगा गया था।

सोमवार को प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक राजीव कुमार द्वितीय ने बताया कि दुर्गा नागपाल का जवाब मिल गया है, जिसका परीक्षण हो रहा है। दुर्गा नागपाल ने जवाब में क्या लिया? उन्होंने इस गोपनीय बताते हुए जवाब देने से इन्कार कर दिया। जबकि सूत्रों का कहना है कि आइएएस दुर्गा नागपाल ने खुद पर लगे आरोप का जवाब पांच पेज में लिया है। हिन्दी में लिखे गए जवाब में उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वह मौके पर गयीं थी।

दुर्गानागपाल ने लिखा है कि मौके पर ग्राम समाज की जमीन पर उपासना स्थल की एक दीवार का निर्माण हो रहा था। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई और उसे ध्वस्त करने का निर्देश दे रखा है, लिहाजा उन्होंने स्थानीय लोगों को समझा-बुझाकर अवैध निर्माण हटाने के लिए राजी किया था। खुद दीवार गिराने से उन्होंने इन्कार किया है।

सूत्रों का कहना है कि जवाब में यह भी कहा है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में कोई तनाव नहीं था। दुर्गा नागपाल ने अपने जवाब में कई स्थानों पर खुद के निर्दोष होने की बात कहते प्रशासनिक दायित्वों के निवर्हन का उल्लेख किया है।

सूत्रों का कहना है कि दुर्गा नागपाल ने उच्चाधिकारियों से निर्देश लेने का जिक्र किया है लेकिन उनके पद या नाम का उल्लेख नहीं किया है।

प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक राजीव कुमार द्वितीय का कहना है कि दुर्गा के जवाब का परीक्षण हो रहा है। विधि और प्रशासनिक पहलुओं का निष्कर्ष निकालने के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।

कुछ और बिन्दुओं पर मांगा जा सकता है जवाब : नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग का नियम कहता है कि किसी आइएएस के जवाब या उसके कुछ बिन्दुओं से अगर शासन संतुष्ट नहीं है तो वह उस पर फैसला लेने से पहले अधिकारी को एक और मौका देते हुए संबंधित बिन्दुओं पर दोबारा भी जवाब मांग सकता है।