15 February 2019



राष्ट्रीय
स्पेशल स्टोरी: नामुमकिन है सुल्तान के 'ह्वाइट हाउस' में पहुंचना
19-08-2013
भारत के दुश्मन नंबर एक और मोस्ट वांटेड अंडरव‌र्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम उर्फ सुल्तान शाह के कराची शहर में होने के सुबूत ने एक बार फिर पाक का नापाक चेहरा सामने ला दिया है। पाकिस्तान में सुल्तान शाह के नाम से रह रहे दाऊद के खासमखास और कई आतंकी वारदातों के वांछित अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के कबूलनामे ने पाकिस्तान के सफेद झूठ को बेपर्दा कर दिया है। पाकिस्तान बार-बार कहता रहा है कि दाऊद उसके यहां नहीं है, लेकिन सच्चाई बार-बार सामने आकर कुछ और ही बयां करती है।

सुल्तान शाह यानी दाऊद का \'ह्वाइट हाउस\' अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास \'ह्वाइट हाउस\' से किसी भी मायने में कम सुरक्षित नहीं है। दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसियों में एक आइएसआइ के शीर्ष एवं सर्वाधिक तेज सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में किलेनुमा सफेद कोठी से ही सुल्तान सारी दुनिया खासकर भारत के खिलाफ अपनी गतिविधियां संचालित करता है। यह कोठी कराची के किनारे और शहर के सबसे पॉश इलाकों में से एक क्लिफ्टन में बनी हुई है। क्लिफ्टन की मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे बनी यह कोठी लगभग 20 बाई 40 वर्गमीटर में फैली है।

इस किलेनुमा कोठी की खासियत यह है कि बीस मीटर चौड़ी होने के बावजूद इसमें मुख्य सड़क की ओर से अंदर प्रवेश का कोई रास्ता नहीं है। कोठी के बायीं ओर करीब 12 फीट का एक गलियारा है जो करीब 40 मीटर अंदर जाकर खत्म होता है। वहीं पर कोठी में प्रवेश का मुख्य द्वार है। यदि कोई व्यक्ति कोठी में जाना चाहेगा तो उसके लिए वह गलियारा पार करना जरूरी होगा। कोठी के दाहिनी ओर सऊदी मस्जिद का परिसर शुरू हो जाता है। कोई भी व्यक्ति बाहर से कोठी के अंदर का नजारा नहीं देख सकता, क्योंकि उसके चारों ओर 20 फीट ऊंची मोटी दीवार है।

यह कोठी अलकायदा के मारे जा चुके मुखिया ओसामा बिन लादेन की एबटाबाद की हवेली से काफी कुछ मिलती जुलती है। कोठी के चारों ओर कोनों पर \'वाच टावर\' बने हैं। इनमें काफी \'हाई फ्रीक्वेंसी\' के कैमरे लगे हैं। ये कैमरे करीब दो सौ मीटर की दूरी तक की तस्वीरें बिल्कुल साफ ले सकते हैं। बाहर से इन टावरों पर कोई भी सुरक्षाकर्मी नहीं दिखाई देता। कोठी के पीछे की ओर समुद्र है। यानी कोठी में जाने के लिए सिर्फ और सिर्फ गलियारे का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। वैसे तो गलियारे में भी कोई सुरक्षाकर्मी नहीं नजर आता, लेकिन जैसे ही कोई नया या अनजान व्यक्ति उसमें प्रवेश करता है तो तुरंत पठानसूट पहने सुरक्षाकर्मी उसे रोक लेते हैं। उसे सख्ती के साथ हिदायत दी जाती है कि यहां घूमने की इजाजत नहीं है।