18 February 2019



प्रादेशिक
आदिवासी समेत झरने में चार लोग बहे
19-08-2013

ग्वालियर [जसं]। सुल्तानगढ़ में झरने के पानी में आए तेज बहाव में तीन लोगों के साथ एक आदिवासी के बहने की खबर है। गोताखोरों की मदद से झरने से संतोष चौधरी और श्यामबिहारी दीक्षित के शव निकाल लिए। मुकेश चौधरी और एक आदिवासी का पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों की प्रशासन के अलावा 500 से अधिक लोग तलाश कर रहे हैं।

शनिवार को दौरार और मोहना निवासी संतोष चौधरी, मुकेश चौधरी, श्यामबिहारी दीक्षित व बृजेश शिवहरे सुल्तानगढ़ के झरने पर गए थे। पानी का बहाव अचानक तेज हो गया, जिससे यह पानी में बह गए। इनमें से बृजेश की पकड़ में एक पत्थर आ गया। कुछ देर बाद मदद के लिए पहुंचे मोहना थाने के जवानों ने स्थानीय लोगों की मदद से रस्सी डालकर उन्हें पानी से बाहर निकाल लिया, लेकिन इनके तीन साथियों का पता नहीं चला। पूरी रात ग्वालियर व शिवपुरी जिला प्रशासन टापू पर फंसे 19 लोगों को बचाने में लगा रहा।

आदिवासी के बह जाने का अंदेशा

झरने में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे अधिकारियों को एक आदिवासी ने बताया कि मछली पक़़डने के लिए उसके साथ सुरेंद्र आदिवासी भी गया था। पानी का तेज बहाव आने के कारण वह एक गुफा में बैठ गया था और तैर कर निकल आया, लेकिन सुरेंद्र का पता नहीं है। अंदेशा है सुरेंद्र पानी के तेज बहाव में ही बह गया है।

2 किमी के दायरे में मिले 2 के शव

झरने में जिस स्थान पर तीनों लोग पानी के साथ बहे उसी स्थान पर गोताखोरों को पानी में उतारा गया। संतोष चौधरी का शव उसी स्थान पर मिल गया, लेकिन श्याम बिहारी का शव पानी में बहकर करीब 2 किमी दूर चला गया था। दोनों शवों को गोताखोर पानी से बाहर निकालकर लाए।

सुबह फिर की जाएगी तलाश

लापता मुकेश चौधरी और सुरेंद्र आदिवासी की सोमवार सुबह फिर से तलाश की जाएगी।

पानी में फंसे लोगों को हिम्मत बंधाई:

हादसे के समय मौजूद कल्याण बाथम उस समय पानी में कूद गया था। पानी का तेज बहाव था। कल्याण ने सबसे पहले पानी में फंसे लोगों के पास पहुंचकर मदद का भरोसा दिलाया था।

उसने इन लोगों को बताया कि यहां से इधर-उधर जाने का प्रयास नहीं करें। और न ही घबराकर पानी में उतरें। पानी का बहाव तेज और गहराई भी है। पानी में फंसे लोगों को हिम्मत बंधाने के बाद कल्याण दूसरी बार इन्हें निकालने के लिए दूसरे छोर पर रस्सी बांधने के लिए तैरकर गया था।