15 February 2019



राष्ट्रीय
सामने आई 12 हजार साल पुरानी संस्कृति
25-08-2013
बिहार विरासत विकास समिति द्वारा कराए गये आरंभिक उत्खनन के दौरान औरंगाबाद के कुटुंबा में बारह हजार साल पुरानी संस्कृति सामने आई है। यहां मिले पत्थर के सूक्ष्म औजारों से मानव के विकास क्रम की व्याख्या में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है। राज्य में अभी तक नवपाषाण युग के अवशेष ही सामने आये थे। इस काल तक मानव विकास के क्रम में काफी आगे आ चुका था। उसने खेती बाड़ी सीख ली थी। नवपाषाण युग में पत्थर की कुल्हाड़ी जैसे उपकरणों का इस्तेमाल शुरू किया जा चुका था। पहली बार सामने आए मध्यकालीन पाषाण युग [5 हजार से 10 हजार ईसा पूर्व] में पत्थर के सूक्ष्म उपकरण प्रमुख हैं। बिहार विरासत विकास समिति के कार्यपालक निदेशक विजय कुमार चौधरी ने बताया कि औरंगाबाद के कुटुम्बा में सामने आए सूक्ष्म औजारों का स्वतंत्र इस्तेमाल संभव नहीं था। अन्य उपकरणों के साथ जोड़ कर दैनिक जीवन में इनका उपयोग किया जाता था। समिति अगले पांच साल तक यहां उत्खनन कराएगी। इससे प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित किए जाने के साथ साथ क्षेत्रीय विशिष्टता को संजोने का लक्ष्य पूरा हो सकेगा। चौधरी ने बताया कि समिति एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट परिसर में मौजूद सैयद अहमद [पहले शिक्षा मंत्री] के आउट हाउस का जीर्णोद्धार भी कराएगी। बिहार बंगाल में हुए दंगों के समय 68 दिनों तक गांधी जी यहां रहे थे। यहां गांधी जी से जुड़ी स्मृतियों को भी जीवंत किए जाने की योजना है।