22 February 2019



प्रादेशिक
बाढ़ के बाद अब तबाही का मंजर
25-08-2013
सीहोर और रायसेन में नर्मदा का जलस्तर जैसे-जैसे कम हो रहा है, बाढ़ से मची तबाही का मंजर सामने आने लगा है। हालांकि करीब छह फीट जलस्तर कम होने के बाद भी नर्मदा अब भी खतरे के निशान से 11 फीट ऊपर चल रही है। पिछले दो दिनों में नर्मदा ने तीनों जिले के 400 से ज्यादा गांव जलमग्न कर दिए थे।

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सीहोर और होशंगाबाद जिले में रहा, जहां प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी बा़़ढ का पानी भरा हुआ है। 10 हजार से ज्यादा लोग राहत शिविरों में हैं, जबकि बा़़ढ से 50 हजार लोगों के प्रभावित होने की खबर है। जिन इलाकों से पानी उतरना शुरू हो गया है, वहां अब बा़़ढ से मची तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। अकेले रायसेन जिले में ही 300 से ज्यादा मकान धराशायी हुए हैं। जबकि सीहोर जिले में एक युवक नर्मदा में बह गया है। होशंगाबाद और सीहोर में शनिवार को पूरे दिन सेना और पुलिस के 3000 से ज्यादा जवान राहत कार्य में जुटे रहे।

इंदौर के पास मोरटक्का पुल बंद होने से सैक़़डों वाहन फंसे हुए हैं और खंडवा जिले के यात्रियों को इंदौर जाने के लिए 130 के स्थान पर 250 किमी का चक्कर लगाना प़़ड रहा है। ब़़डवानी जिले के तटीय क्षेत्र के 17 गांवों में नर्मदा का पानी घुस गया। देवास जिले में सेना ने मोर्चा संभाल लिया है।

होशंगाबाद में बाढ़ से शनिवार सुबह से लोगों को राहत मिलनी शुरू हुई। शाम पांच बजे तक सेठानीघाट का जलस्तर 982 फीट से उतरकर 975.30 फीट हो गया, जो अभी भी खतरे के निशान से 11 फीट ऊपर है। शहर की कई बस्तियों समेत जिले के दर्जनों गांवों में पानी भरा हुआ है। हालांकि बारिश बंद होने से राहत कार्य तेजी से हो रहे हैं। ऐसे में रविवार सुबह तक पानी पूरी तरह उतर जाने की उम्मीद है। इधर सीहोर जिले में बारिश से बाढ़ के कारण कई गांव प्रभावित हुए हैं।

रेहटी के नजदीक जहाजपुरा गांव में नर्मदा नदी पार करते समय बह जाने से एक युवक की मौत हो गई। राहत और बचाव कार्य के दौरान बा़़ढ प्रभावित क्षेत्रों से प्रशासन ने करीब 1500 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। शनिवार को भी जिले में बारिश के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। नर्मदा नदी में आई बा़़ढ से अभी भी करीब 40 गांव में बा़़ढ का पानी भरा हुआ है। खबर लिखे जाने तक शनिवार को नसरल्लागंज और रेहटी क्षेत्र में झमाझम बारिश का दौर जारी था। रायसेन जिले में हुई मूसलाधार बारिश ने बरेली, रायसेन, सिलवानी, उदयपुरा क्षेत्र में 300 से अधिक मकानों को धराशायी कर दिया है, जिससे लोग बेघर हो गए हैं।

माचना का पुल बहा

भारी बारिश के चलते भोपाल-नागपुर नेशनल हाईवे-69 पर माचना नदी पुल का बह गया। लिहाजा, भोपाल-नागपुर हाइवे पर दोनों ओर से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। शाहपुर में पुल के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई है। वहीं बरबटपुर के पास इटारसी-नागपुर रेल लाइन का डाउन ट्रेक शुक्रवार को बहने से दूसरे दिन भी रेल यातायात प्रभावित रहा। सीहोर में बाढ़ के चलते रेहटी-होशंगाबाद, नसरल्लागंज से हरदा और होशगाबाद से सड़क संपर्क टूटा हुआ है। वहीं जयपुर-जबलपुर एनएच-12 बंद होने से बरेली, उदयपुरा का सड़क संपर्क छटवें दिन भी टूटा रहा। इसके अलावा रायसेन-विदिशा मार्ग दूसरे दिन भी बंद रहा।

पेड़ पर बिताई रात

नर्मदा नदी में बाढृ के चलते शुक्रवार की रात एक व्यक्ति ने पेड़ पर बैठ रात बिताई। सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे शनिवार दोपहर दो बजे पे़़ड से उतार कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। जानकारी के अनुसार प्रहलाद पिता चुन्नीलाल यादव नीलकंठ से दो किमी दूर नर्मदा तट पर शुक्रवार दोपहर दो बजे से बा़़ढ में फंसा हुआ था।

हालात सामान्य होने तक सेना रहेगी

भोपाल [ब्यूरो]। प्रदेश में लगातार बारिश के चलते होशंगाबाद और देवास के लिए बुलाई गई सेना बा़़ढ के बाद स्थिति सामान्य होने तक रहेगी। वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर और सेना के चार हेलीकॉप्टर बा़़ढग्रस्त क्षेत्रों में प्रभावितों तक खाने के पैकेट पहुंचाए जाने के काम लगे हैं।

अपर मुख्य सचिव इंद्रनील शंकर दाणी ने नवदुनिया को बताया कि बारिश का क्रम शनिवार की सुबह से थम जाने और बरगी व तवा बांधों से पानी छो़़डा जाना बंद करने से अब बा़़ढग्रस्त इलाकों में पानी उतरना शुरू हो गया है। देवास के नेमावर और होशंगाबाद में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है जबकि छिंदवा़़डा जिले में भी करीब ढाई दर्जन गांव बा़़ढ से घिर गए थे। वहां सेना की मदद की जरूरत नहीं प़़डी और स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मदद से ही लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दिया।