22 February 2019



राष्ट्रीय
सिंधुरक्षक को सतह पर लाने का नहीं निकला कोई रास्ता
28-08-2013
मुंबई में नौसैनिक पनडुब्बी आइएनएस सिंधुरक्षक के साथ हुए हादसे का एक पखवाड़ा बीत रहा है। लेकिन अभी तक न तो इसको सतह पर लाने का रास्ता निकल पाया है, और न ही हादसे के कारणों का पता लगाने को बैठाई जांच रफ्तार पकड़ पाई है। धमाकों और अग्निकांड के बाद तलहटी में जा बैठी पनडुब्बी को निकालने के लिए बुलाई गई विदेशी विशेषज्ञ कंपनियां भी अभी तक इसका कोई कारगर नुस्खा नहीं सुझा सकी हैं। ऐसे में निर्धारित चार हफ्तों की मियाद में जांच का पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है।

अगस्त 13 व 14 की मध्यरात्रि को हुए हादसे में शहीद 18 नौसैनिकों में केवल 8 के शव ही जलमग्न पनडुब्बी से निकल पाए हैं। नौसेना मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक हादसे के बाद से लगातार गोते लगा रही उसके गोताखोरों की टीम को अब मानव शरीर के छितराए हुए अंग ही मिल रहे हैं, जिन्हें अस्पताल भेजा जा रहा है। ऐसे में दस नौसैनिकों के अवशेष भी पूरी तरह मिल पाएंगे या नहीं इस पर बड़ा सवालिया निशान है। पनडुब्बी में दुर्घटना के वक्त तीन अधिकारी और 15 नाविक मौजूद थे।

इस बीच पनडुब्बी को निकालने में आ रही अड़चनों के कारण इसकी जांच अभी किनारे पर बैठने को मजबूर है। इस काम के लिए नीदरलैंड, अमेरिका, सिंगापुर समेत कई मुल्कों से माहिर विशेषज्ञ कंपनियां अपना आकलन तो कर चुकी हैं। लेकिन मदद के लिए बुलाई गई देशी और विदेशी कंपनियों की ओर से इस काम को पूरा करने के तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर रोडमैप अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। सूत्र बताते हैं कि इस बाबत प्रस्तावों को देखने और उनकी व्यवहारिकता जांचने के बाद ही रक्षा मंत्रालय सिंधुरक्षक के बचाव मिशन पर आगे की कार्यवाही का भविष्य तय करेगा।

19 अगस्त को संसद में दिए बयान में रक्षा मंत्री एके एंटनी कह चुके हैं कि पहली प्राथमिकता इस पनडुब्बी को बाहर लाना है। इस काम के लिए दुनिया की नामी विशेषज्ञ एजेंसियों को भी बुलाया गया है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि अभी तक सिंधुरक्षक के बिखरे टुकड़े भी नहीं समेटे जा सके हैं। पनडुब्बी से रिसे तेल व धमाकों के बाद फैले रसायनों के कारण तलहटी में बैठी सिंधुरक्षक की तस्वीर भी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। मौजूदा हालात में इस हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए शुरू हुई बोर्ड आफ इंक्वायरी की जांच चार हफ्तों में पूरी होना मुश्किल है।