24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
सच हुआ कहावत, यहां से आया था हमारी पृथ्वी पर जीवन
30-08-2013

लंदन। अंग्रेजी में कहावत है, मेन आर फ्राम मार्स। ये कहावत अब वैज्ञानिक कसौटी पर भी सच साबित हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी पर जीवन मंगल ग्रह से आने की वैज्ञानिक अवधारणा को अब और बल मिल गया है। इस सिलसिले में अब ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिसके अनुसार मॉलीडेनम नामक एक विशेष तत्व का ऑक्सीडाज्ड खनिज पृथ्वी पर पनपना मुमकिन ही नहीं था। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसी खनिज ने जीवन की उत्पत्ति में अहम भूमिका निभाई थी। उनका ये भी कहना है कि ये खास खनिज पृथ्वी पर नहीं पाया जाता था, बल्कि ये मंगल ग्रह की सतह पर था। इस शोध पत्र को फ्लोरेंस में 23वें गोल्डशिमिड सम्मेलन में पेश किया गया। अमेरिका के वेस्थेमर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर स्टीवेन बेनर ने कहा कि मॉलीडेनम पहली बार पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय उपलब्ध नहीं था। चूंकि तीन अरब साल पहले पृथ्वी की सतह पर आक्सीजन की मात्र बहुत कम थी। इसके अलावा, मंगल ग्रह से पृथ्वी पर आकर गिरे उल्का पिंड में इस तत्व की मौजूदगी पाई गई है। बेनर का कहना है कि जीवन किसी भी रूप में हो वह अर्गेनिक तत्व से बना हुआ है। लेकिन अगर आप उसके आर्गेनिक अणु में उष्मा या रोशनी जोड़ दें तो उससे जीवन की उत्पत्ति नहीं होगी। बल्कि वह एक लिसलिसे गाद, तेल आदि में तब्दील हो जाएगा। आर्गेनिक तत्व में बोरोन और मॉलीडेनम जोड़ने पर ही आर्गेनिक तत्व जैविक रसायन के रूप में परिवर्तित होता है। इसलिए इन दो खनिजों की मौजूदगी ही जीवन की शुरूआत का मूल तत्व है। उन्होंने बताया कि मंगल ग्रह से अरबों साल पहले गिरे उल्का पिंड का हाल में अध्ययन किए जाने के बाद पता चला कि मंगल ग्रह पर बोरोन तत्व था। ये पहले ही स्पष्ट हो चुका है कि मंगल ग्रह पर अरबों साल पहले मॉलीडेनम ऑक्सीडज्इच्ड रूप में था।

एक अन्य धारणा ये भी है कि पृथ्वी के शुरूआती सालों में जीवन की उत्पत्ति इसलिए भी दुष्कर रही होगी क्योंकि पूरी धरती पानी में डूबी थी। इस कारण वहां पर्याप्त मात्र में बोरोन पनप नहीं सकता था। चूंकि वह पूरी तरह से सूखे स्थानों पर ही होता है। लेकिन जल आरएनए से जुड़ाव रखता है। वैानिकों का ये भी मत है कि पहला आनुवांशिक अणु इसी से पैदा हुआ। मंगल पर भी पानी था पर पृथ्वी के मुकाबले वहां कम था। इन सबूतों के आधार पर कहा जा सकता है कि मानव मंगल ग्रह की ही देन है। इसीलिए जीवन की उत्पत्ति मंगल पर शुरू हुई जो उल्का पिंडों की चट्टानों के जरिए पृथ्वी तक पहुंची।