19 February 2019



खेलकूद
टी-20 ने बल्लेबाजों को आक्रामक बनाया
07-09-2013

(सुनील गावस्कर) क्रिकेट अब 365 दिन और 24 घंटे का खेल बन चुका है। इसके कैलेंडर को देखकर तो ऐसा ही लगता है। एशेज खत्म होने के तुरंत बाद ही दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी टी-20 और वनडे सीरीज के लिए आमने-सामने आ गए। इसके अलावा जिंबाब्वे में पाकिस्तान वनडे और टेस्ट सीरीज खेल रही है। इसके थोड़ी देर बाद ही अलग समय वाले किसी देश में कोई न कोई सीरीज शुरू हो गई होगी। इसलिए क्रिकेट के दीवानों के लिए जी भर के क्रिकेट देखने का पूरा मौका है। वेस्ट इंडीज में त्रिकोणीय सीरीज के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से ब्रेक मिला हुआ है। टीम के कुछ सदस्य पांच वनडे मैचों की सीरीज खेलने के लिए जिंबाब्वे भी गए, लेकिन उसके बाद से वह आराम फरमा रहे हैं। इनमें से अधिकतर अब चैंपियंस लीग टी-20 में व्यस्त हो जाएंगे, जो कि अंतरराष्ट्रीय सत्र से पहले एक च्च्छा वॉर्म अप साबित हो सकता है। आने वाले समय में भारत के लिए कई बड़ी चुनौती हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज और लगातार सुधार कर रही वेस्ट इंडीज के खिलाफ दो टेस्ट की सीरीज। उसके बाद दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड का दौरा। इस बीच एशिया कप और विश्व टी-20 चैंपियनशिप होनी है। ऐसे में खिलाड़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए हमेशा फिटनेस बनाए रखनी होगी। हालांकि कुछ लोगों का यह मानना है कि टी-20 प्रारूप खिलाड़ियों के लिए कुछ च्च्छा नहीं कर रहा है, फिर भी टी-20 ने कुछ खिलाड़ी खासतौर से बल्लेबाजों के खेल कोज्ज्यादा पॉजीटिव और आक्रामक बना दिया है, जो उन्हें खेल के लंबे प्रारूप में भी मदद कर रहा है। टी-20 एक ऐसा प्रारूप है, जिसका लुत्फ गेंदबाज नहीं उठाते क्योंकि उन्हें पता रहता है कि बल्लेबाज पहली ही गेंद से उन पर हमला बोलने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे में स्तरीय बल्लों के विकसित होने से मिसहिट भी बाउंड्री के बाहर चली जाती है। फिर भी कुछ चालाक गेंदबाज ऐसे तरीके ढूंढ निकालते हैं, जिससे उनको मिलने वाली सजा कम हो जाती है। एरोन फिंच ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं, जिन्हें आइपीएल में खेलने का फायदा हुआ और उन्होंने खुद को ऑस्ट्रेलिया की सीमित ओवरों की टीम में खुद को स्थापित किया। पिछले दिनों स्कॉटलैंड के खिलाफ बड़ी पारी खेलने वाले फिंच को आइपीएल ने एक नया जीवन दिया। (पीएमजी)