17 February 2019



प्रादेशिक
वीराने में आसाराम की एक और ऐशगाह
07-09-2013

इंदौर। आसाराम की एक और ऐशगाह का खुलासा। कीचड़ भरे पगडंडीनुमा रास्ते.. घने पेड़ और फिर कुछ खेतों के बीच बनी उस आलीशान कोठी को ढूंढ निकाला, जिसके बारे में आसाराम के सेवादारों को भी भनक नहीं। चार सौ से अधिक आश्रमों की मिल्कियत वाले आसाराम के इस अति-गोपनीय ठिकाने की कांटेदार बाड़बंदी और ऊंची चाहरदीवारी से किलेबंदी की गई है। बापू जब तन्हाई के तमन्नाई होते, तो यही उनका पसंदीदा ठिकाना था।

दो बैरियर, कड़ा पहरा

खंडवा रोड बायपास से 7 किलोमीटर दूर शिवनगर में बनी आलीशान कोठी के चारों तरफ दो स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। करीब 5 एकड़ में फेंसिंग और चारों तरफ ऊंची बाउंड्रीवॉल है। अंदर जाने से पहले कांटेदार बाड़बंदी पर बैरियर है। इससे गुजरने के चार सौ मीटर बाद एक गेट है। टीम जब यहां पहुंची तो बैरियर कुछ अति विश्वासपात्र सेवादारों के पहरे में था। पहले टालू जवाब मिला, ये तो फार्म हाउस है। टीम ने आगे जांच शुरू की तो ये सेवादार भिड़ने को उतारू हो गए, न जाने कौन सा राज खुल जाने का डर था?

पांच सितारा है सब कुछ

इस फार्म हाउस में सारा इंतजाम पांच सितारा है। शानदार इंटीरियर, प्राकृतिक सौंदर्य। अतिथि कक्ष के अलावा यहां आसाराम का खास शयनकक्ष है। एयर कंडीशनर, एलईडी, फ्रीज, कालीन, किंग साइज बेड.. हर सुविधा। मेन गेट के बायीं तरफ एक गोशाला भी है।

अकेले आते हैं आसाराम

ग्रामीणों ने बताया कि आसाराम अक्सर यहां आते हैं। तब उनके साथ न अनुयायी रहते हैं और न दर्शनार्थियों की भीड़। एकांतवास के दौरान वे किसी से नहीं मिलते थे। ग्रामीणों ने कभी-कभी आसाराम को सुबह पैदल पास की नदी तक सैर करने जाते जरूर देखा है।

यहां था फरारी काटने का इंतजाम

गिरफ्तारी से पहले भी आसाराम के इस सुनसान स्थान पर आने की सुगबुगाहट थी। उनके कुछ सेवादारों ने बारिश से खराब सड़क के गड्ढे भरवाए थे। सड़क से कीचड़ हटाया गया। आसाराम के इंदौर आ जाने के बाद यहां सरगर्मी बढ़ गई थीं। यहां की सुरक्षा संभालने वाले सेवादारों ने कुछ ग्रामीणों से चर्चा की थी कि आसाराम यहां आने वाले हैं।