19 February 2019



खेलकूद
उथप्पा बने हार के मुजरिम
31-03-2012
खेल डेस्क. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दोस्ताना टी-20 मुकाबले में भारत को 11 रन से हार का सामना करना पड़ा है। डकवर्थ लुइस नियम के मुताबिक भारत को 7.5 ओवरों में 83 रन का लक्ष्य दिया गया। भारत इस पार स्कोर से 11 रन पीछे रह गया। वैसे तो टीम इंडिया की इस हार के लिए बारिश को जिम्‍मेदार ठहराया जा रहा है, लेकिन यदि स्कोरकार्ड पर गौर किया जाए तो हार के लिए जिम्‍मेदार एक खिलाड़ी नजर आता है। वो हैं रॉबिन उथप्पा।मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने वांडरर्स के ऐतिहासिक मैदान पर जमकर रन बनाए। पहली से लेकर अंतिम गेंद तक दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज तेजी से रन बटोरते नजर आए। लेकिन इस मामले में भारतीय बल्लेबाज फीके पड़ गए।वांडरर्स  की पिच हमेशा से बल्लेबाजों के अनुकूल रही है। यह वही पिच है जहां दक्षिण अफ्रीका ने 434 रन के सबसे बड़े लक्ष्य को हासिल कर इतिहास रचा था। लेकिन भारत के सलामी बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ऐसे खेल रहे थे, जैसे वो ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में बल्लेबाजी कर रहे हों।यदि उथप्पा ने गौतम गंभीर की तरह तेजी से रन बटोरे होते, तो डकवर्थ लुइस नियम लगने के बावजूद भारत जीत जाता।टीम इंडिया बारिश के बाद संशोधित लक्ष्य से 11 रन पीछे रह गई। उथप्पा ने 19 गेंदों का सामना करते हुए कुल 18 रन बनाए। इस पारी में कुल मिलाकर 1 चौका लगा। जबकि गंभीर ने 28 गेंदों में खेली नाबाद 49 रन की पारी में 7 चौके और 1 छक्का लगाया। यदि उथप्पा ने भी वनडे की जगह टी-20 स्टाइल में ही यह मैच खेला होता, तो भारत विजेता होता।गलती रही धोनी की भी...मैच के दौरान बारिश हो सकती है, इसका अनुमान पहले ही लग गया था। यदि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने चतुराई दिखाते हुए विराट कोहली जैसे इन-फॉर्म बल्लेबाज को ओपनिंग के लिए भेजा होता, तो वो गंभीर के साथ मिलकर तेजी से रन बनाते और रन रेट बेहतर रखते। लेकिन धोनी ने लंबे समय बाद वापसी कर रहे उथप्पा को भेजा। धोनी का यह फैसला समझ से परे था। उथप्पा ने पिछले चार साल से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला है। पिछले साल अक्टूबर में उन्‍हें इंग्लैंड के खिलाफ उन्हें एक टी-20 खेलने का मौका जरूर मिला था, लेकिन उसमें उथप्‍पा का संघर्ष कुल तीन गेंदों तक ही चल सका। इसके बावजूद उथप्पा को सलामी बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, वो भी तब, जब टीम को तेजी से रन बनाने की जरूरत थी।