16 February 2019



राष्ट्रीय
मोदी की परेशानी बढ़ा सकता है 'तोता'
13-09-2013
घर के भीतर के अवरोधों को नरेंद्र मोदी ने भले ही पार कर लिया हो, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले मनमोहन सरकार का तोता उनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। इस सिलसिले में गुजरात दंगों में मोदी को घेरने की कोशिशें नाकाम होने के बाद सीबीआइ के सहारे अब फर्जी मुठभेड़ों में उनका नाम घसीटने की कोशिश हो सकती है। पिछले दिनों फर्जी मुठभेड़ों के आरोपी गुजरात कैडर के आइपीएस डीजी वंजारा के इस्तीफे के पत्र को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। ध्यान देने की बात है कि वंजारा ने इस्तीफे की प्रति सीबीआइ निदेशक को भी भेजी है। शुरू में सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा ने वंजारा के पत्र को सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन, अब इस पत्र का संज्ञान लेते हुए सीबीआइ के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम वंजारा से पूछताछ करने के लिए गुजरात भेजी जा रही है। इस टीम की कोशिश वंजारा से फर्जी मुठभेड़ों में मोदी या उनके निकट सहयोगी अमित शाह के खिलाफ ठोस जानकारी लेने की होगी। ऐसी स्थिति में वंजारा का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया जा सकता है क्योंकि ऐसा बयान अदालत के सामने सुबूत माना जाता है। इशरत मुठभेड़ में सीबीआइ के चंगुल में फंसे खुफिया ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक राजेंद्र कुमार को भी मोदी के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत राजेंद्र कुमार को इस मामले में बचाने का भरोसा देकर सरकारी गवाह बनाया जा सकता है। शर्त यही होगी कि वह इशरत मुठभेड़ गुजरात के राजनीतिक आकाओं के इशारे पर होने का खुलासा करें। अभी राजेंद्र कुमार इसके लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन, उनके पास कोई और रास्ता भी नहीं है। सीबीआइ ने इस मामले में गत चार जुलाई को दाखिल पहली चार्जशीट में ही राजेंद्र कुमार के इशरत मुठभेड़ की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा दिया था। राजेंद्र कुमार 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके खिलाफ चार्जशीट को लेकर फिलहाल सीबीआइ ने चुप्पी साध रखी है।